‘बेकार की PIL में माहिर हैं आप’, क्यों अचानक भड़क गए CJI सूर्यकांत, बोले- पब्लिसिटी से बचिए

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार चुनावों से संबंधित एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका का समय बर्बाद करने वाली तुच्छ और निरर्थक याचिकाओं को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अदालत ने वकील को कठोर शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएं केवल पब्लिसिटी पाने के उद्देश्य से दायर की जाती हैं, न कि किसी वास्तविक सार्वजनिक हित के लिए।

सुनवाई के दौरान ‘साबू स्टीफन बनाम भारत संघ’ मामले में सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के तर्कों से असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ‘यदि आपने तुच्छ याचिकाएं दायर करने की कला में महारत हासिल कर ली है, तो हमें यह भी जानना चाहिए कि जुर्माना लगाए जाने पर आप कितनी कीमत चुका सकते हैं।’ अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी याचिकाएं अक्सर केवल बाहर की पब्लिसिटी के लिए हैं, और इनका उद्देश्य किसी लोकहित या लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना नहीं है।

सीजेआई सूर्यकांत ने यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की वित्तीय स्थिति की जांच की जाएगी, ताकि भविष्य में यदि उस पर जुर्माना लगाया जाए, तो उसकी वसूली सुनिश्चित हो सके। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा, ‘हम याचिकाकर्ता को पिछले पांच वर्षों का अपना आयकर रिटर्न (ITR) रिकॉर्ड रखने का निर्देश देते हैं।’

लीगल विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह कठोर रुख उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है, जो लोकहित की आड़ में राजनीतिक या व्यक्तिगत एजेंडा चलाने के लिए जनहित याचिका का दुरुपयोग करते हैं। कोर्ट के इस कदम से संकेत मिला है कि अब बिना ठोस आधार के अदालत का समय बर्बाद करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

यह फैसला यह दर्शाता है कि सुप्रीम कोर्ट अब ऐसे मामलों पर सख्ती से निपटने के लिए तैयार है, जिनका उद्देश्य केवल पब्लिसिटी या व्यक्तिगत लाभ प्राप्त करना हो, और जो वास्तविक लोकहित से सम्बंधित न हों।

यह भी पढ़े : ईरान से पहले अमेरिका ने इन 5 देशों से लड़ा था युद्ध, एक देश से डरकर वापस बुलाई थी सेना

खबरें और भी हैं...

अपना शहर चुनें