
नई दिल्ली : अक्सर लोग जोड़ों के दर्द, मसूड़ों की समस्या या दांतों में दर्द को उम्र बढ़ने की सामान्य शिकायत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन बार-बार दांत टूटना या ढीले होना सिर्फ डेंटिस्ट की समस्या नहीं, बल्कि हड्डियों से जुड़ी गंभीर समस्या ऑस्टियोपोरोसिस का शुरुआती संकेत हो सकता है।
हर साल 20 अक्टूबर को ‘वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे’ मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को हड्डियों की घनत्व कम होने वाली इस बीमारी के बारे में जागरूक करना है। ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियों की मजबूती धीरे-धीरे कम होती है और इसका असर जबड़े की हड्डी पर भी पड़ता है, जो दांतों के लिए आधार का काम करती है।
जबड़े और दांतों पर ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण
1. दांत ढीले या टूटना
जब जबड़े की हड्डी कमजोर हो जाती है, तो दांतों की जड़ें मजबूती से हड्डी में टिक नहीं पाती। परिणामस्वरूप दांत बिना किसी चोट के ढीले या टूटने लगते हैं।
2. मसूड़ों का सिकुड़ना (Gum Recession)
कमजोर हड्डी मसूड़ों को पर्याप्त सहारा नहीं देती। इससे मसूड़े धीरे-धीरे नीचे की ओर हटने लगते हैं। मसूड़ों की जड़ों के पीछे दांत की जड़ें दिखाई देने लगती हैं और दांत में संवेदनशीलता बढ़ जाती है। साथ ही मसूड़ों के संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।
3. डेन्चर का फिट न होना
जो लोग दांतों के नुकसान के बाद डेन्चर का उपयोग करते हैं, उन्हें ऑस्टियोपोरोसिस के कारण जबड़े की हड्डी तेजी से घिसने लगती है। इससे डेन्चर बार-बार एडजस्ट करने की जरूरत पड़ती है।
क्या करें?
- संतुलित आहार: कैल्शियम, विटामिन D और विटामिन K2 से भरपूर भोजन लें।
- व्यायाम: वजन उठाने वाले व्यायाम हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।
- स्वास्थ्य आदतें: धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें।
- नियमित जांच: दांतों की जांच के दौरान अपने डेंटिस्ट से हड्डियों के स्वास्थ्य पर भी चर्चा करें।
ध्यान दें: बार-बार दांत टूटना, मसूड़ों में बदलाव या डेन्चर का फिट सही न होना ऑस्टियोपोरोसिस का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।















