आखिर इत्ता सन्नाटा क्यों है भाई…अखिलेश दुबे के खिलाफ शिकायतों की भरमार, लेकिन कार्रवाई सुस्त…

  • सोशल मीडिया के साथ-साथ गली-नुक्कड़ों में गूंज रहे तमाम सवाल
  • क्या लखनऊ से कोई दबाव है या नया सिरदर्द लेने की चाहत नहीं
  • क्या नये पुलिस कमिश्नर ही तय करेंगे ऑपरेशन महाकाल की उम्र
  • दस सितंबर के बाद तय होगा साकेत दरबार पर सख्ती का पैमाना

भास्कर ब्यूरो
कानपुर। सावन की रिमझिम में शुरू हुआ ऑपरेशन महाकाल भादों की बारिश में सुस्त है। साकेत दरबार के मुखिया अखिलेश दुबे के खिलाफ एसआईटी को तमाम शिकायतें हासिल हुई हैं, लेकिन एफआईआर की संख्या पांच से आगे नहीं बढ़ी। अखिलेश दुबे के खिलाफ मोर्चाबंद चेहरों ने तमाम साक्ष्य सौंपे हैं, लेकिन गवाही और मैराथन पूछताछ के बावजूद अपनी तहरीर पर एफआईआर का इंतजार अनंत है। आखिर अखिलेश दुबे का साम्राज्य ढहाने निकली खाकी के कदम क्यों थम गये हैं। क्या राजधानी लखनऊ से कोई दबाव है, अथवा पुलिस की गुप्त रणनीति। मुमकिन है कि, लिखा-पढ़ी के मास्टर अखिलेश दुबे के खिलाफ कानूनी शिकंजा कायदे से कसने के लिए साक्ष्यों-गवाहों-बयानों के तारतम्य को जोड़ने की मशक्कत में एसआईटी उलझी होगी। अपने-अपने कयास हैं, लेकिन जवाब किसी के पास नहीं है।

प्रज्ञा-मनोहर समेत तमाम को अनजाना भय
दरअसल, अखिलेश दुबे के खिलाफ मर्दानी हुंकार लगाने वाली प्रज्ञा त्रिवेदी को कमिश्नर अखिल कुमार के दौर में इंसाफ की गगनचुंबी उम्मीद है, लेकिन अपने खिलाफ प्रकाशित अश्लील साहित्य समेत तमाम साक्ष्य एसआईटी को सौंपने के एक पखवारे बाद भी प्रज्ञा की शिकायत पर एफआईआर नहीं दर्ज हुई है। ऐसे में प्रज्ञा रोजाना कभी खाकी से तो कभी मीडिया से सवाल पूछती हैं कि, आखिर दिक्कत क्या है। उन्हें अनजाना भय है कि, अतीत की तर्ज पर क्या फिर अखिलेश दुबे के सिंडिकेट ने कानून को बंधक बना लिया है। मैनपुरी में तैनात क्षेत्राधिकारी
ऋषिकांत शुक्ला के खिलाफ मोर्चा संभाले मनोहर शुक्ला भी साक्ष्यों का बंडल लेकर घूम रहे हैं, लेकिन एफआईआर में आज-कल से परेशान हैं। किसी वक्त ऋषिकांत के बेहद करीबी मनोहर के झोले में कथित तौर पर साकेत दरबार से जुड़े लोगों की काली करतूतों के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। बावजूद, मनोहर को सख्त कार्रवाई का इंतजार है। कुल मिलाकर अखिलेश दुबे तथा सिंडिकेट के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई नहीं होने से शिकायतकर्ताओं में अनजाना भय है।

गली-नुक्कड़ और कचहरी में सवालों की बौछार
साकेत दरबार के खिलाफ कार्रवाई में अचानक सुस्ती ने शहर को चर्चा का नया विषय मुहैया कराया है। कचहरी से गली-नुक्कड़ में चाय-नाश्ते की दुकानों में एक ही सवाल कौंध रहा है कि, आखिरकार अचानक इत्ता सन्नाटा क्यों। कोई अतीत के हवाले से दावा करता है कि, अखिलेश दुबे के चहेते आला अफसरों ने सरकार को मैनेज कर लिया है। कोई बताता है कि, अमुक मंत्री और विधायक की पैरवी ने रंग दिखाया है। इसी कयासबाजी के दरमियान कोई उम्मीदों की पोटली खोलकर दावा करता है कि, एसआईटी ने तमाम साक्ष्य जुटा लिये हैं, सिर्फ दो-चार दिन में एफआईआर सामने होगी। अलबत्ता दो-चार दिन मियाद कई मर्तबा आगे सरक चुकी है। अखिलेश दुबे सिंडिकेट के समर्थकों का दावा है कि, लखनऊ के फरमान पर कमिश्नरेट पुलिस ने फिलहाल, साकेत दरबार के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा बांध दिया है। अब नए पुलिस कमिश्नर के आने के बाद शिकायतों का भविष्य तय होगा।

एसआईटी अपनी जांच में व्यस्त, दूसरों पर गाज
शिकवा-शिकायतों से इतर ऑपरेशन महाकाल के तहत शिकायतों की जांच में जुटी एसआईटी को आरोपों से कोई वास्ता नहीं है। पैमाने पर खरी शिकायतों की जांच जारी है। इसी क्रम में पश्चिम शहर में नेगी ब्रदर्स के खिलाफ और पूर्वी शहर में अवध बिहारी यादव, प्रदीप गुप्ता और साहेब लारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हुई है। एसआईटी प्रभारी के मुताबिक, अखिलेश दुबे के खिलाफ शिकायतों की जांच अंतिम दौर में है, जल्द ही साक्ष्यों के आधार पर अग्रिम कार्रवाई होगी।

कोट्स…
शिकायतों की संख्या को देखते हुए एसआईटी में सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई है। शिकायतों को परखने के बाद साक्ष्यों के आधार पर भूमाफियाओं और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित है।
अखिल कुमार, पुलिस कमिश्नर

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