दिल्ली के रामलीला मैदान में क्यों चला बुलडोजर, कैसे शुरू हुआ विवाद…जानें पूरी कहानी

Ramlila Maidan Encroachment: दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान से जुड़े अतिक्रमण विवाद ने राजधानी की राजनीति, प्रशासन और कानून व्यवस्था को एक साथ हिला दिया है। मिली जानकारी के अनुसार इस पूरे मामले की शुरुआत Save India Foundation नामक NGO की शिकायत से हुई थी। अब यह विवाद दिल्ली हाई कोर्ट, MCD, दिल्ली वक्फ बोर्ड, L&DO और DDA के बीच एक बड़े कानूनी और प्रशासनिक टकराव में बदल गया है। 6 जनवरी की रात हुई बुलडोजर कार्रवाई ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया।

शिकायत और ज्वाइंट सर्वे

Save India Foundation ने रामलीला मैदान की जमीन पर अवैध अतिक्रमण को लेकर MCD में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि सार्वजनिक जमीन पर अवैध निर्माण करके उसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है और इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। इसके बाद 16 अक्टूबर 2025 को L&DO, DDA और MCD ने संयुक्त रूप से एक ज्वाइंट सर्वे किया।

सर्वे में खुलासा हुआ कि 2,512 वर्ग फुट PWD की जमीन और फुटपाथ पर अवैध अतिक्रमण हुआ था। वहीं 36,428 वर्ग फुट रामलीला मैदान की जमीन पर बारात घर, पार्किंग और एक डायग्नोस्टिक सेंटर अवैध रूप से बनाए गए थे। यह जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए थी, लेकिन उसका व्यावसायिक दुरुपयोग किया जा रहा था।

दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका और निर्देश

Save India Foundation ने मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की। 12 नवंबर 2025 को हाई कोर्ट ने MCD को तीन महीने के भीतर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया। सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया गया।

MCD, वक्फ बोर्ड और L&DO की सुनवाई

मामले की पहली सुनवाई 24 नवंबर 2025 को हुई। DC (L&E) की अध्यक्षता में MCD, फैज़-ए-इलाही मस्जिद की मैनेजमेंट कमेटी, दिल्ली वक्फ बोर्ड, DDA और L&DO के प्रतिनिधि मौजूद थे। L&DO ने साफ कहा कि विवादित जमीन कभी भी वक्फ बोर्ड को नहीं दी गई।

दूसरी सुनवाई 16 दिसंबर 2025 को हुई। मैनेजमेंट कमेटी ने दावा किया कि दरगाह फ़ैज़-ए-इलाही 100 साल से पुरानी है और आज़ादी से पहले भी यहां मस्जिद और कब्रिस्तान था। दिल्ली वक्फ बोर्ड ने 1940 के रिकॉर्ड के आधार पर 0.195 एकड़ जमीन पर मालिकाना हक जताया। L&DO ने भी इस जमीन की पुष्टि की, लेकिन उसके आगे बनी इमारतें अवैध मानी गईं।

MCD का निष्कर्ष

MCD ने पाया कि 1959 में L&DO ने 30 एकड़ जमीन MCD को रामलीला मैदान के लिए दी थी, लेकिन कोई दस्तावेज नहीं है जो विवादित जमीन को वक्फ बोर्ड से जोड़े। 1970 के Gazette Notification में भी कोई ठोस सबूत नहीं है। केवल 0.195 एकड़ जमीन ही वक्फ से जुड़ी साबित हुई। MCD ने स्पष्ट किया कि बारात घर और डायग्नोस्टिक सेंटर का उपयोग सार्वजनिक जमीन का दुरुपयोग है और इन्हें हटाया जाना चाहिए।

6 जनवरी 2026 की बुलडोजर कार्रवाई

6 जनवरी 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद MCD ने भारी पुलिस और अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी में बुलडोजर कार्रवाई शुरू की। जैसे ही बुलडोजर मौके पर पहुंचे, दरगाह के आसपास सैकड़ों लोग जमा हो गए और सुरक्षाबलों पर पथराव किया।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े। मस्जिद और दरगाह की ओर जाने वाले सभी रास्ते बैरिकेड कर दिए गए। संकरी गलियों को भी सील कर दिया गया और पूरी जगह को कॉर्डन ऑफ करने के बाद MCD ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की।

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