
अंकुर त्यागी
आज ही के दिन 1931 में हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध लेखिकाओं, उपन्यासकारों तथा कहानीकारों में से एक मन्नू भंडारी का जन्म हुआ था, उनका जन्म मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के भानपुर गांव में हुआ था। मन्नू भंडारी के बचपन का नाम महेंद्र कुमारी था लेकिन इन्होंने लेखन कार्य के लिए अपना नाम मन्नू रख लिया। मन्नू भंडारी के पिता का नाम सुखसंपत राय और माता जी का नाम अनूप कुमारी था। इनका कुल पांच भाई बहनों का परिवार था।
इनके पिता सुख संपतराय भंडारी स्वतंत्रता सेनानी के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी थे और आमदनी के लिए हिंदी और इंग्लिश तथा मराठी डिक्शनरी के निर्माता का कार्य भी करते थे। जिससे वह अपने परिवार को पालते थे। मन्नू भंडारी द्वारा लिखी रचनाएं आम आदमी के जीवन के इर्द गिर्द घूमती हैं। इसीलिए पाठक वर्ग मन्नू भंडारी के साहित्य की ओर अपने आप आकर्षित होते हैं।उनके लेखन की सादगी और सामाजिक यथार्थ को चित्रित करने की अद्वितीय शैली आज भी नई पीढ़ी के लेखकों और पाठकों को प्रेरित करती है।
मन्नू भंडारी की शिक्षा
मन्नू भंडारी की प्रारंभिक शिक्षा अजमेर के ‘सावित्री गर्ल्स हाईस्कूल’ में हुयी थी | इन्टरमीडिएट तक शिक्षा उन्होंने यहीं हासिल की | बार-बार पिता का तबादला होने के कारण उनकी शिक्षा अलग-अलग स्थानों से पूर्ण हुयी | अजमेर के कॉलेज में बी.ए. में प्रवेश न दिए जाने पर उन्होंने कॉलेज के खिलाफ आन्दोलन किया | आजादी के उपरांत उन्हें उसी कॉलेज में दाखिला तो मिला परन्तु वहां पर पढाई बीच में ही छोड़कर कलकत्ता अपनी बड़ी बहन शुशीला के पास चली गयीं | वर्ष 1949 में उन्होंने कलकत्ता से ही बी.ए. की डिग्री हासिल की | यहाँ बी.ए. में उनका विषय हिंदी नहीं था | कलकत्ता में एक वर्ष आध्यापन का कार्य करने बाद उन्होंने बनारस विश्वविद्यालय से बतौर बहिस्थ विद्यार्थी हिंदी विषय से एम.ए. की डिग्री हासिल की |
मन्नू भंडारी की प्रमुख रचनाएँ–
उपन्यास- एक इंच मुस्कान , आपका बंटी , महाभोज , स्वामी
कहानी संग्रह – मैं हार गई , तीन निगाहों की एक तस्वीर , यही सच है , एक प्लेट सैलाब , त्रिशंकु , नायक – खलनायक विदूषक ।
नाटक – बिना दीवारों का घर , महाभोज ( नाट्य रूपांतर ) , उजली नगरी चतुर राजा।
बाल साहित्य – आँखों देखा झूठ
कहानी संग्रह – कलवा
उपन्यास – आत्मकथा – एक कहानी यह भी ।
पुरस्कार और सम्मान
उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए हिंदी अकादमी के शिखर सम्मान सहित उन्हें अनेक पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं जिनमें भारतीय भाषा परिषद्, कोलकाता, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के पुरस्कार शामिल हैं।
मन्नू भंडारी का निधन
15 नवंबर 2021 को, मन्नू भंडारी का निधन हो गया। उनके निधन से हिंदी साहित्य जगत ने एक महत्वपूर्ण स्तंभ खो दिया। उनके साहित्यिक कार्यों ने उन्हें हिंदी साहित्य के इतिहास में अमर बना दिया है। मन्नू भंडारी का साहित्यिक योगदान और उनकी रचनाएं हिंदी साहित्य में हमेशा जीवित रहेंगी।