
ढाका। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर हाल ही में बांग्लादेश की यात्रा पर हैं। इसी दौरान, उन्होंने ढाका में पाकिस्तानी संसद के स्पीकर अयाज सादिक से शिष्टाचार के तहत हाथ मिलाया। यह घटना पाकिस्तान अपनी जीत बताकर मीडिया में प्रचारित कर रहा है, जबकि भारत का स्पष्ट रुख है कि आतंकवाद और बातचीत साथ नहीं चल सकते।
पाकिस्तान का दावा और भारत का रुख
पाकिस्तान ने इस घटना को अपनी राजनीतिक जीत के रूप में बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का प्रयास किया है। पाकिस्तान के बयान में ऑपरेशन सिंदूर जैसे आतंकवादी अभियानों से प्राप्त जख्मों का हवाला देते हुए कहा गया है कि वह लगातार बातचीत, संयम और सहयोग के उपायों पर जोर दे रहा है, जिसमें शांति वार्ता और संयुक्त जांच के प्रस्ताव भी शामिल हैं। पाकिस्तान का दावा है कि यह कदम आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के प्रयासों का हिस्सा है और तनाव कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
वहीं, भारत का रुख स्पष्ट है कि आतंकवाद और राजनयिक बातचीत साथ नहीं चल सकते। भारत ने पहले ही आतंकवाद के खिलाफ कठोर कदम उठाए हैं। इस साल की शुरुआत में, पाकिस्तानी आतंकी हमले के बाद भारत ने अपने राजनयिक संबंधों में कमी की है।
भारत ने पाकिस्तानी अधिकारियों से संवाद कम कर दिए हैं। 1960 में हुए इस ऐतिहासिक समझौते को भारत ने निलंबित कर दिया है, जिसे विश्व बैंक ने करवाया था। यह कदम भारत की सुरक्षा चिंताओं का परिणाम है। सीमा पार आवाजाही और अन्य द्विपक्षीय संपर्कों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। भारतीय सशस्त्र बलों ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी कैंपों पर सटीक हमले किए हैं। पाकिस्तानी आतंकी बुनियादी ढांचे को लक्षित कर भारत ने अपने सुरक्षा हितों की रक्षा की है।
भारत का मानना है कि आतंकवाद के साथ बातचीत संभव नहीं है और जब तक पाकिस्तान अपने आतंकी नेटवर्क को खत्म नहीं करता, तब तक संचार और सहयोग सीमित ही रहेंगे। यह कदम भारत की सुरक्षा नीति का हिस्सा है, जो आतंकवाद के खिलाफ कठोर और निर्णायक कार्रवाई करता है।
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