क्या-क्या करेगा चीन? लैब में बना डाली ऐसी मछली, जानकर पूरी दुनिया हैरान!

बहुत से लोग मछली खाना तो चाहते हैं, लेकिन उसमें मौजूद बारीक कांटों के गले में फंसने का डर उन्हें रोक देता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए मछली खिलाना हमेशा जोखिम भरा माना जाता है। स्वाद के बीच अगर एक छोटा-सा कांटा भी गले में फंस जाए, तो पूरा मजा खराब हो जाता है। इसी डर को खत्म करने के लिए चीन के वैज्ञानिकों ने ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिसे जानकर दुनिया हैरान है।

चीन के वैज्ञानिकों ने लैब में ‘हड्डी रहित’ यानी Bone Free Fish तैयार की है। इस मछली में मांस के अंदर पाए जाने वाले वे बारीक और खतरनाक कांटे नहीं होते, जो आमतौर पर मछली खाने में सबसे बड़ी परेशानी बनते हैं। इसका मतलब है कि अब लोग बिना किसी डर के मछली का स्वाद ले सकेंगे।

यह अनोखा प्रयोग चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज (CAS) के वैज्ञानिकों ने किया है। उन्होंने चीन में लोकप्रिय ‘गिबेल कार्प’ (Gibel Carp) नाम की मछली को चुना, जिसमें आमतौर पर 80 से ज्यादा बेहद बारीक Y-शेप कांटे होते हैं। इन्हीं कांटों के कारण इस मछली को खाने में सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है।

वैज्ञानिकों ने रिसर्च के दौरान Cgrunx2b नाम के एक जीन की पहचान की, जो मछली के मांस में बारीक कांटे बनने के लिए जिम्मेदार होता है। इसके बाद उन्होंने CRISPR तकनीक (जिसे आणविक कैंची भी कहा जाता है) की मदद से इस जीन को मछली के DNA से हटा दिया। नतीजा यह हुआ कि जो मछली पैदा हुई, वह पूरी तरह सामान्य तरीके से बढ़ी, लेकिन उसके मांस में एक भी बारीक कांटा नहीं बना।

सबसे राहत की बात यह है कि इस जेनेटिक बदलाव का मछली के स्वाद या सेहत पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा। मछली की रीढ़ की हड्डी पूरी तरह सुरक्षित है, जिससे वह आसानी से तैर सकती है और सामान्य रूप से विकसित होती है। यानी केवल बिन बुलाए मेहमान — बारीक कांटे — ही उसके शरीर से गायब हुए हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर भविष्य में यह तकनीक आम उपयोग में आ गई, तो लोग बिना किसी डर के मछली खाने का पूरा आनंद ले सकेंगे। यह खोज न सिर्फ खाने की दुनिया में क्रांति ला सकती है, बल्कि मछली प्रेमियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

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