
वॉशिंगटन डीसी : ईरान में जारी जबरदस्त विरोध प्रदर्शनों के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एक ईरानी अधिकारी ने पहली बार स्वीकार किया है कि देशभर में हुए प्रदर्शनों और सुरक्षा कार्रवाई के दौरान करीब 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब बीते दो हफ्तों से ईरान व्यापक अशांति, हिंसा और अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दावा किया जा रहा है कि मारे गए लोगों में प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बल दोनों शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने मृतकों का अलग-अलग ब्योरा नहीं दिया। आर्थिक बदहाली से भड़के ये प्रदर्शन बीते तीन सालों में ईरानी सत्ता के लिए सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती माने जा रहे हैं।
आर्थिक संकट से भड़का जनआक्रोश
ईरान में विरोध की आग खराब आर्थिक हालात से भड़की है। महंगाई आसमान छू रही है, ईरानी मुद्रा रियाल 14 लाख प्रति डॉलर के पार पहुंच चुकी है और रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ईंधन सब्सिडी में कटौती और आयात पर विशेष विनिमय दर हटाने से आम जनता का गुस्सा और भड़क गया। ये प्रदर्शन अब ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं, जिससे सरकार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
सरकार का दोहरा रुख: वैध विरोध, लेकिन सख्त कार्रवाई
ईरान की धार्मिक सत्ता, जो 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से शासन कर रही है, विरोध प्रदर्शनों को लेकर दोहरी नीति अपना रही है। एक ओर आर्थिक समस्याओं को लेकर विरोध को ‘वैध’ बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा बलों को सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। सरकार ने अमेरिका और इज़राइल पर आरोप लगाया है कि वे हालात को बिगाड़ने की साजिश कर रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि जिन लोगों को वे “आतंकी” बता रहे हैं, उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को हिंसक बना दिया।
लाइव फायर के आदेश सीधे खामेनेई से?
ईरान इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट ने हालात को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने खुद प्रदर्शनकारियों पर लाइव गोलियां चलाने की इजाजत दी थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने औपचारिक आदेश जारी किया, जिसके तहत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और बसीज मिलिशिया ने मुख्य रूप से फायरिंग की। यह फैसला सरकार की तीनों शाखाओं की जानकारी और सहमति से लिया गया।
रिपोर्टिंग पर पाबंदी, इंटरनेट ब्लैकआउट
ईरान में हालात की सही तस्वीर सामने आने में बड़ी बाधा इंटरनेट बंदी और संचार प्रतिबंध बने हुए हैं। पिछले कुछ दिनों में इंटरनेट लगभग पूरी तरह ठप रहा, जिससे जानकारी का प्रवाह बुरी तरह प्रभावित हुआ। इसके बावजूद, रॉयटर्स द्वारा सत्यापित वीडियो में रात के समय प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें, गोलीबारी और जलते हुए वाहन व इमारतें साफ देखी गईं।
गिरफ्तारियां और मानवाधिकार संगठनों की चिंता
मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि सैकड़ों लोगों की मौत पहले ही हो चुकी थी और हजारों को गिरफ्तार किया गया है। रॉयटर्स के मुताबिक, अब तक 10,700 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, हालांकि ईरानी सरकार ने आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं। एसोसिएटेड प्रेस ने कहा है कि इंटरनेट बंदी और रिपोर्टिंग पर रोक के चलते वह मौतों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सका।
बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव
यह अशांति ऐसे वक्त पर हुई है, जब ईरान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय दबाव में है। जून में इज़राइल के साथ 12 दिन का युद्ध, ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले और क्षेत्रीय सहयोगियों के कमजोर पड़ने से तेहरान की स्थिति और नाजुक हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हिंसक हत्या” जारी रखता है, तो अमेरिका जवाब देगा, हालांकि उन्होंने बातचीत की इच्छा भी जताई है।















