
Waqf Bill : वक्फ बिल को लकेर जहां लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोक-झोक चल रही है, वहीं अब मौलाना कासमी ने 1947 की घटना का जिक्र कर देश में सांप्रदायकि बहस छेड़ दी है। वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर मौलाना कासमी ने कहा, “यह बिल पास हुआ तो देश में 1947 वाले हालात हो जाएंगे।”
दरअसल, मौलाना कासमी का यह बयान वक्फ संशोधन बिल को लेकर किया गया है। मौलाना अपने एक अन्य साथी से बात करे थे कि अगर यह वक्फ बिल देश में पास हुआ तो फिर से देश में 1947 वाले हालात हो जाएंगे। यह सीधे तौर देश में एक बार फिर से विभाजन की और इशारा था।
मौलाना कासमी का यह बयान सांप्रदायिक दंगों को बढ़ाने के इरादे से दिया गया है। 1947 में भारत का विभाजन हुआ था औऱ पाकिस्तान ने जन्म लिया था। उस समय मुस्लिम समाज के लोगों ने अलग देश बनाने की इच्छा से देश मेें सांप्रदायिक हिंसा की थी। जिससे देश को काफी हानी हुई थी।
1947 का विभाजन और भारत-पाकिस्तान का निर्माण मुस्लिम समुदाय के लिए एक कठिन समय था, जिसमें कई धार्मिक और सांस्कृतिक समस्याएं पैदा हुईं। विभाजन के दौरान मुस्लिम समुदाय के संपत्तियों और वक्फ संपत्तियों पर कई सवाल उठे, क्योंकि इन संपत्तियों का नियंत्रण अक्सर धार्मिक संस्थाओं या समुदायों के पास होता था, जो अब दो देशों में बंट गए थे।
मौलाना कासमी ने भारत और पाकिस्तान के विभाजन की ऐतिहासिक घटना का जिक्र कर वक्फ बिल का विरोध करने के लिए मुस्लिम समाज के लोगों को भड़काने का प्रयास किया। मौलाना का कहना है कि वक्फ संशोधन विधेयक में केंद्र सरकार को वक्फ संपत्तियों के नियंत्रण का अधिकार देने की बात की जा रही है, जो उनके अनुसार वक्फ संपत्तियों की स्वायत्तता और मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।
मौलाना ने कहा कि अगर इस बिल को लागू किया गया, तो यह मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचा सकता है, जैसा कि 1947 में विभाजन के दौरान हुआ था, जब मुस्लिम संपत्तियों का प्रबंधन और नियंत्रण उनके हाथ से चला गया था। इस तरह, मौलाना कासमी ने वक्फ बिल के संभावित प्रभावों के संदर्भ में 1947 की घटना को याद किया।