
Ram Mandir : बिहार के पूर्वी चंपारण की पावन धरती पर एक ऐसा ‘आधुनिक अजूबा’ आकार ले रहा है, जो न केवल पत्थरों की नक्काशी बल्कि इंसानी दिलों के जुड़ाव की अद्भुत गाथा लिख रहा है। ‘विराट रामायण मंदिर’ के रूप में बन रहा यह विश्व का सबसे ऊंचा देवालय, अयोध्या के राम मंदिर को भी भव्यता और विस्तार में पीछे छोड़ देगा।
लेकिन इस मंदिर की असली नींव ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि उस सांप्रदायिक सद्भाव से रखी गई है, जहां इश्तियाक अहमद खान जैसे मुस्लिम परिवारों ने करोड़ों की जमीन दान कर ‘साझा विरासत’ के अर्थ को जीवंत कर दिया है। यह मंदिर केवल हिंदू आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की उस अटूट एकता का प्रमाण है, जहां राम और शिव के नाम पर मजहब की दीवारें ढह जाती हैं।
विराट रामायण मंदिर सामाजिक समरसता का वैश्विक उदाहरण पेश कर रहा है। महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव सायन कुणाल ने इस साझा विरासत को सलाम किया है। 120 एकड़ के विशाल परिसर के लिए केवल हिंदू ही नहीं, बल्कि मुस्लिम परिवारों ने भी लगभग 20 एकड़ जमीन दान में दी है। कैथवलिया के इश्तियाक अहमद खान ने अकेले 2.5 करोड़ रुपये की भूमि देकर यह साबित कर दिया कि जब राष्ट्रहित और आस्था का मिलन होता है, तो भेदभाव का कोई स्थान नहीं रह जाता।
270 फीट की गगनचुंबी ऊंचाई और 1080 फीट की लंबाई के साथ यह दुनिया का सबसे विशाल हिंदू मंदिर बनने की ओर अग्रसर है। परिसर में 22 भव्य मंदिरों का समूह होगा, जिसमें कुल 18 शिखर इसकी भव्यता में चार चांद लगाएंगे। लगभग 1000 करोड़ की लागत से बन रहे इस मंदिर में गुलाबी चुनार पत्थर और राजस्थानी नक्काशी का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह ढांचा इतना मजबूत होगा कि सदियों तक भूकंप के झटकों को भी आसानी से झेल सकेगा।
मंदिर की महिमा को बढ़ाने के लिए यहां दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित किया जा रहा है। तमिलनाडु के महाबलीपुरम से 47 दिनों की चुनौतीपूर्ण यात्रा कर 5 जनवरी को यह शिवलिंग चंपारण पहुंचा है। 17 जनवरी को इसकी प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी, जिसके लिए गंगोत्री और मानसरोवर सहित पांच पवित्र नदियों का जल लाया गया है। इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा और भव्य उत्सव की तैयारी की गई है।
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