
देहरादून : भारतीय वन्यजीव संस्थान के एक अध्ययन में महाराष्ट्र के ब्रहमपुरी वन प्रभाग में एक बाघिन के व्यवहार से जुड़ी रोचक जानकारियां सामने आई हैं। अध्ययन के लिए बाघिन पर GPS कॉलर और एक्टिविटी सेंसर लगाए गए, जो उसके शरीर की गतिविधियों, मूवमेंट और शारीरिक संकेतों को ट्रैक करते हैं। इसके साथ ही कैमरा ट्रैप और प्रत्यक्ष अवलोकन के जरिए 10 महीने तक बाघिन की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई।
संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. बिलाल हबीब के अनुसार, यह पहली बार है कि किसी बाघिन पर एक्टिविटी सेंसर (एक्सेलेरोमीटर) लगाकर उसकी चाल, आराम, शिकार और लंबी दूरी की यात्रा जैसी सभी गतिविधियों को मापा गया। यह अध्ययन Ecology and Evolution Journal में प्रकाशित हुआ है। इससे बाघिन के व्यवहार को समझते हुए मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और संरक्षण की योजनाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
अध्ययन के अनुसार, बाघिन दिन में लगभग 65% समय आराम करती है, जो ऊर्जा बचाने की रणनीति का हिस्सा है। उसका यात्रा का समय लगभग 20% है, और लंबी दूरी की यात्रा मुख्यतः शाम के समय की जाती है। मौसम के अनुसार भी उसकी गतिविधियों में बदलाव देखा गया: गर्मी और सर्दी में वह सुबह और शाम के समय अधिक सक्रिय रहती है, जबकि मानसून में शाम के समय उसकी सक्रियता बढ़ जाती है।















