
उत्तरकाशी : परम्परागत विज्ञान और ग्रामीण नवाचार को समझने के लिए आईआईटी रूड़की के डिज़ाइनिंग विभाग के 20 छात्र तथा पीएचडी स्कॉलर शनिवार को डुंडा पहुंचे। घराट श्रृंखला के संस्थापक व अध्यक्ष विजयेश्वर प्रसाद डंगवाल ने बताया कि यह दल विकास खण्ड डुण्डा के विभिन्न गांवों में चार दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर रहेगा, जहां विद्यार्थी घराट, परम्परागत खेती, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय जीवन शैली का गहन अध्ययन करेंगे।
इस अध्ययन यात्रा का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समुदाय में निरन्तर कार्य कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुभवों से सीखते हुए यह समझना है कि पहाड़ों में आर्थिक, सामाजिक व पर्यावरणीय संतुलन हेतु किन स्थानीय मॉडलों को मजबूत किया जा सकता है। डंगवाल ने कहा कि पहाड़ों पर आजीविका के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। हमारे पूर्वज कभी भी प्रकृति का अनुचित दोहन नहीं करते थे, और अब समय है कि हम पुनः उन सतत् जीवन मूल्यों की ओर लौटें।
अरण्य गंगा अस्तल, डुण्डा में आयोजित इस शैक्षणिक कार्यक्रम के दौरान छात्र पारंपरिक घराट तकनीक, जलधारा आधारित ऊर्जा, स्थानीय कृषि प्रथाओं और ग्रामीण पर्यटन मॉडल का व्यवहारिक अध्ययन करेंगे। भ्रमण के पश्चात विद्यार्थी एक समग्र व योजनाबद्ध प्रस्ताव तैयार करेंगे, जो भविष्य में पहाड़ों के संतुलित व सतत विकास हेतु उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता देवेश कोठारी ने जल संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पहाड़ों में पानी तेज़ी से मैदानी क्षेत्रों की ओर बह जाता है, जिससे भूजल पुनर्भरण नहीं हो पाता। ऐसे में चाल, खाल एवं खन्ती जैसी पारंपरिक जल-संरक्षण प्रणालियाँ पुनः विकसित कर बरसाती जल को रोका जा सकता है। राज्य सरकार द्वारा पुरस्कृत जानकी देवी ने ऊनी वस्त्र की पारंपरिक रंगाई व कताई के गुर छात्रों को सिखाये। इस मौके पर आई आई टी के पी एच डी स्कॉलर गजेन्द्र, देवेश कोठारी दिनेश भट्ट पिंकी के साथ चिराग, अनिल डंगवाल नंदनी एवं मास्टर आफ डिज़ाइनिंग के 20 छात्र छात्राओं ने प्रतिभाग किया।














