
UP SIR Draft List : उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों के साथ ही मतदाता सूची से नाम कटौती का मुद्दा भी गहरा राजनीतिक विवाद बन गया है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीती थीं, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने 33 सीटें हासिल की थीं। इन नतीजों को अगर जिला-वार वोटर लिस्ट कटौती से जोड़ा जाए, तो दोनों दलों की जीतने वाले इलाकों में बड़ा फर्क नजर आता है, जो आगामी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव पर भी बड़ा असर डाल सकता है।
समाजवादी पार्टी के जिलों में मतदाता सूची से नाम कटौती का स्तर
समाजवादी पार्टी के जिलों में आमतौर पर मतदाता सूची से नाम कटौती का स्तर 15 से 25 प्रतिशत के बीच रहा है, हालांकि कहीं-कहीं यह इससे अधिक या कम भी दिखी है। प्रमुख सीटों की बात करें तो कन्नौज में 21.57%, मैनपुरी में 16.17%, शामली जिले में 16.75%, मुजफ्फरनगर में 16.29%, मुरादाबाद में 15.76%, रामपुर में 18.29%, संभल में 20.29%, फिरोजाबाद में 18.13%, एटा में 16.80% और बदायूं में 20.39% मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
वहीं, बरेली जिले के अंवला लोकसभा क्षेत्र में 20.99%, खीरी जिले में दोनों सीटों पर 17.50%, लखनऊ जिले के मोहनलालगंज में सबसे अधिक 30.04% नाम कटौती दर्ज हुई है। इसके अलावा, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, इटावा, जालौन, हमीरपुर, बांदा, फतेहपुर, कौशाम्बी, अयोध्या, अम्बेडकर नगर, श्रावस्ती, बस्ती और संत कबीर नगर जैसे जिलों में भी 10 से 20 प्रतिशत के बीच मतदाता सूची से नाम हटाए गए हैं।
बीजेपी के जिलों में भी ज्यादा नाम कटौती
वहीं, बीजेपी की जीत वाले जिलों में भी मतदाता सूची से नाम कटौती का स्तर अपेक्षाकृत अधिक है। कई जगह यह 20 से 30 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उदाहरण के तौर पर, मेरठ में 24.65%, गाजियाबाद में 28.83%, गौतमबुद्ध नगर में 23.98%, बुलंदशहर में 15.14%, बरेली में 20.99%, हाथरस में 16.30%, मथुरा में 19.19%, हापुड़ में 22.30%, शाहजहांपुर में 21.76%, कन्नौज में 21.57%, फर्रुखाबाद में 20.80%, बहराइच में 20.44%, बदायूं में 20.39%, कानपुर नगर में 25.50%, आगरा में 23.25%, वाराणसी में 18.18% और लखनऊ में 30.04% नाम मतदाता सूची से बाहर हुए हैं।
इसके अलावा, प्रयागराज (फूलपुर) में 24.64%, गोंडा में 18.40%, सिद्धार्थनगर में 20.33%, महराजगंज में 15.11%, गोरखपुर में 17.61%, कुशीनगर में 18.65%, देवरिया में 17.22% और भदोही में 16.73% मतदाताओं के नाम कटे हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों की राय: नुकसान किसका?
इन आंकड़ों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्रा का मानना है कि इन आंकड़ों से अभी यह तय करना मुश्किल है कि किस पार्टी को नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि जब तक ग्राउंड पर जाकर यह पता नहीं लगाता कि किस समुदाय, इलाके और बूथ पर कितने वोट कटे हैं, तब तक अंतिम निर्णय लेना संभव नहीं है।
मिश्रा का कहना है, “सिर्फ आंकड़ों के आधार पर किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। असली तस्वीर तो तब ही सामने आएगी जब हम जमीनी हकीकत का विश्लेषण करेंगे।”
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