
लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में होने वाली सभी भर्तियों और चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और शुचितापूर्ण बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में नकल माफियाओं के खिलाफ खुफिया जानकारी जुटाते हुए यूपी एसटीएफ को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या-51 के तहत अप्रैल 2025 में आयोजित सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) परीक्षा में अनियमितताओं, धांधली और अवैध धन वसूली से जुड़ी अहम जानकारियां मिलीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी गोपनीय जांच के निर्देश दिए।
जांच के दौरान प्राप्त सूचनाओं के आधार पर यूपी एसटीएफ ने 20 अप्रैल 2025 को बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गिरोह के तीन आरोपियों—महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल—को गिरफ्तार किया। यह गिरोह 16 और 17 अप्रैल 2025 को आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में धांधली और अवैध वसूली में शामिल था। इस संबंध में थाना विभूतिखंड, जनपद लखनऊ में मुकदमा संख्या 144/25 दर्ज किया गया है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।
जांच की निष्पक्षता और गोपनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष से त्यागपत्र भी ले लिया गया, क्योंकि मुख्य आरोपी महबूब अली उनके गोपनीय सहायक के रूप में कार्यरत था। पूछताछ में महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसने मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र निकालकर कई अभ्यर्थियों को पैसे लेकर उपलब्ध कराए। उसकी स्वीकारोक्ति की पुष्टि एसटीएफ की विस्तृत विवेचना और डेटा एनालिसिस से हुई है।
आगे की जांच में गिरफ्तार आरोपियों और उनसे जुड़े अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबरों का डेटा विश्लेषण किया गया, साथ ही मुखबिर तंत्र से मिली सूचनाओं के आधार पर अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान हुई। आयोग से संदिग्ध अभ्यर्थियों का डेटा मंगवाकर मिलान करने पर यह स्पष्ट हुआ कि परीक्षा की शुचिता भंग हुई है।
इन सभी तथ्यों के आधार पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहायक आचार्य परीक्षा को निरस्त करने के आदेश दिए हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देशित किया गया है कि परीक्षा का पुनः आयोजन शीघ्र, पूर्णतः निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित किया जाए।










