Ujjain: उज्जैन में शराबबंदी के बाद उठी ये मांग…बोले ‘शराब बंद तो अब मांस की बिक्री भी बंद करो सरकार’

1 अप्रैल से धार्मिक नगरी उज्जैन में मदिरा की बिक्री पर रोक लगाई गई है, जिससे नागरिकों में खुशी का माहौल है। सरकार की इस पहल का स्वागत किया जा रहा है, लेकिन एक संगठन, स्वर्णिम भारत मंच, इस कदम से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। संगठन का कहना है कि सरकार ने केवल मदिरा की बिक्री पर ही रोक लगाई है, जबकि उनकी मांग वर्षों से उज्जैन में मांस और कत्लखानों पर भी पाबंदी लगाने की रही है।

स्वर्णिम भारत मंच के अध्यक्ष दिनेश श्रीवास्तव ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनके संगठन की मांग के अनुसार, मांस का खुलेआम विक्रय रोकने का आदेश दिया था। हालांकि, इसके बावजूद उज्जैन के धार्मिक स्थानों के पास खुले में मांस की बिक्री अभी भी जारी है, जो धार्मिक नगरी की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। उनका कहना है कि महाकाल की नगरी में आने वाले श्रद्धालुओं को सड़क पर मांस और मटन चिकन जैसी चीजें दिखने से धार्मिक नगरी की छवि गंदी हो रही है।

स्वर्णिम भारत मंच ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उज्जैन को पवित्र नगरी का दर्जा देते हुए, 2005 में तय सीमा क्षेत्र को बढ़ाकर 2 किलोमीटर किया जाए, ताकि धार्मिक नगरी की प्रतिष्ठा और वैभव को सुनिश्चित किया जा सके। इस संदर्भ में, ब्रह्मलीन संत प्रतीतराम रामस्नेही के आंदोलन का भी जिक्र किया गया, जिन्होंने तीन दशक पहले उज्जैन को पवित्र नगरी बनाने के लिए संघर्ष किया था। उनका मानना था कि मांस और मदिरा विक्रय पर प्रतिबंध के बिना उज्जैन की धार्मिक छवि को संपूर्ण रूप से स्थापित नहीं किया जा सकता।

स्वर्णिम भारत मंच का कहना है कि मुख्यमंत्री की पहल से मदिरा बिक्री पर रोक जरूर एक सराहनीय कदम है, लेकिन मांस विक्रय और कत्लखानों पर भी पाबंदी लगाई जानी चाहिए। संगठन का यह मानना है कि यदि मांस और कत्लखाने पर रोक नहीं लगाई जाती है तो संत प्रतीतराम रामस्नेही की आत्मा को शांति नहीं मिल सकेगी।

संगठन ने सरकार से यह आग्रह किया है कि वे उज्जैन के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को बनाए रखने के लिए इस मुद्दे पर कड़ा कदम उठाएं, जिससे पवित्र नगरी की धार्मिक छवि को और भी मजबूती मिल सके।

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