वेनेजुएला क्यों चाहता है अमेरिका? ट्रंप को मिलेगा बड़ा खजाना और भारत पर पड़ेगा ये असर…

Explainer US Venezuela Tension : अमेरिका ने वेनेजुएला पर कब्जा करने के इरादे से हैड ऑफ द नेशन को कैप्चर कर लिया। डोनाल्ड ट्रंप की सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया। अमेरिका की नजर वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर है, वह इनका उपयोग कर भारत समेत कई विकास की दौड़ में आगे बढ़ रहें देशों को कंट्रोल करना चाहता है। इससे ये साफ है कि अगर अमेरिका का वेनेजुएला पर पूर्ण अधिकार हो जाता है तो भारत पर इसका बड़ा असर पड़ेगा। चलिए ये भी जानते हैं कि आखिर ट्रंप को तेल संसाधनों से ओतप्रोत देश पर कब्जे की जरूरत क्यों पड़ी? क्या ट्रंप रूस को पछाड़कर भारत को डराना चाहते हैं?

अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया है और वहां की सरकार को अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास कर रहा है। इस कदम के साथ ही, अमेरिका ने वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर नियंत्रण पाने का लक्ष्य भी तय किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी तेल कंपनियों को वेनेजुएला के खराब हो चुके तेल ढांचों को सुधारने और फिर से उत्पादन शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। इसका मतलब है कि अमेरिका वहां निवेश कर अपने ऊर्जा हितों को मजबूत करेगा।

डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा है कि अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला का तेल उत्पादन फिर से शुरू करेंगी और इसे अपने देश में इस्तेमाल करने के साथ-साथ विदेशों, खासतौर पर चीन को भी सप्लाई करेंगी। यानी, अमेरिका अपने तेल संसाधनों का इस्तेमाल न केवल खुद के लिए बल्कि अन्य देशों को सप्लाई करने के लिए भी करेगा। इससे अमेरिका को आर्थिक लाभ मिलेगा और उसकी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अभी भी वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंध लागू रहेंगे। इसका अर्थ है कि जब तक ये प्रतिबंध हटते हैं, तब तक वेनेजुएला का तेल पूरी तरह से बाजार में नहीं आएगा। परन्तु, अमेरिका की यह रणनीति तेल के बाजार में उसके प्रभाव को बढ़ाने की दिशा में है।

वेनेजुएला पर अमेरिका का कब्जा होने पर भारत को कितना नुकसान?

अब सवाल ये है कि भारत जैसे तेल आयातक देशों को इसका क्या नुकसान या फायदा होगा। यदि अमेरिका और अन्य तेल-निर्माण देशों द्वारा वेनेजुएला के तेल का उत्पादन बढ़ता है, तो तेल की कीमतें स्थिर या कम हो सकती हैं। पर अगर प्रतिबंध जारी रहते हैं या तेल की आपूर्ति कम हो जाती है, तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। भारत को अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इससे घरेलू बाजार महंगा हो जाएगा और पेट्रोल-डीजल जैसी जरूरी वस्तुओं का खर्च बढ़ेगा। इससे उद्योग-धंदों पर भी प्रभाव पड़ेगा, और महंगाई बढ़ने के खतरे भी हैं।

चीन पर भी पड़ेगा असर

अमेरिका का वेनेजुएला पर कब्जा अगर हो जाता है तो सबसे ज्यादा नुकसान चीन को होगा। चूंकि चीन वेनेजुएला से सबसे ज्यादा तेल खरीददार है। इसलिए, चीन के व्यापार पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। भारत को भी इस स्थिति में अपने ऊर्जा स्रोतों की विविधता और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना पड़ेगा।

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