
गाजियाबाद : गाजियाबाद में सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा लगातार चिंता बढ़ा रहा है। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, बीते तीन वर्षों में जिले में सड़क हादसों के मामलों में इजाफा हुआ है और वर्ष 2025 में मौतों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई। बढ़ते वाहन, कमजोर सड़क ढांचा और यातायात नियमों की अनदेखी इस गंभीर स्थिति की प्रमुख वजह मानी जा रही है।
आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 में गाजियाबाद में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे जुड़ी मौतों का ग्राफ पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक रहा। यातायात पुलिस और अधिकारियों ने हालात सुधारने के लिए कई कदम उठाने का दावा किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर चुनौती अब भी बनी हुई है।
2025 में सबसे ज्यादा सड़क हादसे और मौतें
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में गाजियाबाद में कुल 1,097 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 400 लोगों की जान चली गई, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है। इसी दौरान 849 लोग घायल भी हुए।
पिछले वर्षों की तुलना में क्या कहते हैं आंकड़े
यातायात पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक
- 2022 में 886 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 363 मौतें दर्ज की गईं।
- 2023 में दुर्घटनाओं की संख्या बढ़कर 991 हो गई और 365 लोगों की मौत हुई।
- 2024 में 996 सड़क हादसों में 381 लोगों ने जान गंवाई।
- 2025 में यह आंकड़ा और बढ़ते हुए 1,097 दुर्घटनाओं और 400 मौतों तक पहुंच गया।
- घायलों की संख्या भी हर साल बढ़ती गई, जो 2025 में सबसे अधिक 849 रही।
बढ़ते वाहनों को माना जा रहा है बड़ी वजह
पुलिस उप आयुक्त (यातायात) त्रिगुन बिसेन के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या बढ़ने का एक बड़ा कारण सड़कों पर वाहनों की लगातार बढ़ती तादाद है।
उन्होंने कहा,
दुर्घटनाओं की संख्या कम करने के लिए हमने 22 हॉटस्पॉट, यानी उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान की है और विभिन्न एजेंसियों को सड़क इंजीनियरिंग में सुधार करने के लिए कहा है। इसके अलावा, हमने तीन महत्वपूर्ण कॉरिडोर की भी पहचान की है, जहां हस्तक्षेप के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं।
तीन ‘महत्वपूर्ण कॉरिडोर’ किए गए चिन्हित
दिसंबर 2025 में यातायात पुलिस ने दुर्घटनाओं की अधिक संख्या को देखते हुए जिले में तीन महत्वपूर्ण गलियारों की पहचान की। इनमें दिल्ली–मेरठ रोड पर मोदीनगर क्षेत्र, वेव सिटी के पास दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) का हिस्सा और आईएमएस कॉलेज से मसूरी तक राष्ट्रीय राजमार्ग-9 का खंड शामिल है।
सड़क ढांचे की कमी भी बनी समस्या
सामाजिक कार्यकर्ता और वकील विक्रांत शर्मा ने सड़क सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा,
“एक्सप्रेसवे और राजमार्गों पर खड़ी गाड़ियों के कारण कई दुर्घटनाएं हुई हैं। साथ ही जिले में उचित डिवाइडर, ट्रैफिक कट, अपर्याप्त साइनबोर्ड आदि जैसे सड़क यातायात बुनियादी ढांचे की भी कमी है। इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने वालों की संख्या भी बहुत अधिक है। इन सभी कारणों से दुर्घटनाएं और मौतें होती हैं।”
यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्ती
अधिकारियों का कहना है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज की गई है। सहायक पुलिस आयुक्त (यातायात) जियाउद्दीन अहमद के अनुसार,
“हमारे कर्मी यातायात नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सक्रिय रूप से कार्रवाई कर रहे हैं। हम सड़क इंजीनियरिंग में सुधार के लिए विभिन्न एजेंसियों के संपर्क में हैं और जन-जागरूकता अभियान भी सक्रिय रूप से चला रहे हैं।”
चालान के आंकड़े भी चौंकाने वाले
- यातायात पुलिस द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में नियम उल्लंघन के मामलों में कुल 14,48,130 चालान जारी किए गए।
- 2023 में यह संख्या 16,42,422 रही।
- 2024 में 13,42,612 चालान काटे गए।
2025 में हेलमेट के बिना वाहन चलाने के सबसे ज्यादा मामले सामने आए, जिसमें 6,91,125 चालान जारी किए गए। गलत दिशा में वाहन चलाने पर 1,92,380 और प्रतिबंधित क्षेत्रों में पार्किंग करने पर 1,71,692 चालान काटे गए।











