
भारत ने बुधवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। यह जवाबी हमला जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद किया गया। इस ऑपरेशन की खास बात यह रही कि भारत ने पहली बार बड़े पैमाने पर लोइटरिंग म्यूनिशन, यानी आत्मघाती ड्रोन्स का इस्तेमाल किया।
क्या होते हैं आत्मघाती ड्रोन?
आत्मघाती ड्रोन्स को लोइटरिंग म्यूनिशन या कामिकेज़ ड्रोन भी कहा जाता है। ये विशेष प्रकार के बिना पायलट वाले हवाई हथियार होते हैं जो आसमान में दुश्मन के इलाके में मंडराते रहते हैं और जैसे ही टारगेट की पुष्टि होती है, उस पर झपटकर विस्फोट कर देते हैं। ये एक बार इस्तेमाल होने वाले हथियार होते हैं, यानी ये टारगेट के साथ खुद भी तबाह हो जाते हैं।
इन ड्रोन्स का आकार, पेलोड (विस्फोटक सामग्री) और रेंज अलग-अलग हो सकती है। इनकी सबसे बड़ी ताकत है इनकी सटीकता और दुश्मन के इलाके में चुपचाप पहुंचने की क्षमता।
इन ड्रोन्स का पहली बार इस्तेमाल 1980 के दशक में हुआ था, लेकिन 1990 और 2000 के बाद इनका चलन युद्धों में बढ़ गया। यमन, इराक, सीरिया और हाल ही में यूक्रेन युद्ध में भी इनका भारी इस्तेमाल देखने को मिला है। 2021 में इन्हें व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया गया था।
ऑपरेशन सिंदूर की बड़ी बातें:
- भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।
- आतंकी ठिकानों की जानकारी खुफिया एजेंसियों ने दी थी।
- पूरी कार्रवाई भारतीय सीमा के भीतर रहकर की गई।
- बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद, मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा, और पीओके के बाघ, कोटली, मुजफ्फराबाद, गुलपुर, सियालकोट जैसे इलाकों में आतंकी ठिकाने निशाना बने।
- पाकिस्तानी सेना के ठिकानों को इस ऑपरेशन में नहीं छुआ गया।
रक्षा मंत्रालय ने इस ऑपरेशन की जानकारी बुधवार तड़के 1:44 बजे साझा की। यह कार्रवाई भारत की आतंकवाद के खिलाफ बदलती रणनीति को दर्शाती है, जिसमें अब अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है।