
- कथक में नवाचारों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई
कसया, कुशीनगर। शास्त्रीय व सिनेमाई कथक पर गहरी पकड़ रखने वाले व पद्मविभूषण स्व. पंडित बिरजू महाराज की विरासत के उत्तराधिकारी पंडित जयकिशन महाराज ने कहा है कि पाश्चात्य नृत्य से शास्त्रीय कथक की कोई तुलना नहीं है। कथक रोटी है तो पाश्चात्य नृत्य पिज्जा है। पिज्जा कभी–कभी की चीज है जबकि रोटी संगिनी है।
कथक में कालका बिंदादीन घराने की आठवीं पीढ़ी के पंडित जयकिशन बुधवार की सुबह पूर्व सांसद राजेश पांडेय के आवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कथक को भगवान कृष्ण की सोलह कलाओं को भाव व नृत्य के माध्यम की गई प्रस्तुति बताया। कहा कि कथक भारतीय जनमानस के रंग रंग में समाया है। पाश्चात्य नृत्य से इसकी तुलना नहीं की जा सकती है। पुरानी फिल्मों में भरतनाट्यम का दौर था। पाकीजा, तीसरी कसम, छनक छनक पायल बाजे, मुगले आजम दर्जनों फिल्मों में कथक है।
उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब कथक घरानों से निकलकर देश की गलियों तक आएगा। इस दिशा में कार्य हो रहा है। ‘दिल तो पागल है’ फिल्म में कोरियोग्राफी के लिए प्रसिद्ध पंडित जयकिशन पारंपरिक कथक को समकालीन तत्वों के साथ कुशलतापूर्वक मिश्रित करते हैं। चार बर्ष की उम्र में अपने पिता के सानिध्य में कथक की यात्रा शुरू करने वाले जयकिशन की गीत लेखन, संगीत रचना और कोरियोग्राफी में विशेषज्ञता है।
यह भारत आइकन अवार्ड, बिजनेस एंड एंटरटेंमेंट अवॉर्ड, गौरव अवॉर्ड, दिल्ली रत्न अवार्ड से सम्मानित हुए हैं। ठुमरी, दादरा, भजन सहित 300 से अधिक बंदिशे लिखने वाले कथक गुरु इन दिनों कथक में नवाचारों को बढ़ावा देने के काम में जुटे हुए हैं।