विषकन्या ने आखिरकार कबूला गुनाह : सरकारी गवाह बनने को तैयार रवि सतीजा पर इल्जाम लगाने वाली….

  • कोतवाली थाने में वकील के खिलाफ लिखवाई एफआईआर
  • तहरीर की फर्द में बर्रा वाले फर्जी मुकदमे की कहानी सुनाई
  • जिसका वकालतनामा लगाया गया, उसे ही जानकारी नहीं थी
  • सिंडिकेट ने फर्जी दस्तखत से दाखिल किया वकालतनामा

भास्कर ब्यूरो

कानपुर। साकेत दरबार की विष-कन्याओं तक खाकी के हाथ पहुंच गए हैं। स्वयं-भू सुंदरी मिस त्रिपाठी फिलहाल परदे के पीछे हैं, लेकिन तीन विष-कन्याओं ने सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताकर अखिलेश दुबे सिंडिकेट की सजा को मुकम्मल करने की दिशा में पुलिस का काम आसान किया है। पुलिस के पहरे में महफूज विष-कन्या बहनों ने स्वीकार किया है कि, साकेत दरबार के मुंशी पिता-पुत्र के साथ-साथ टोनू यादव के कहने पर अमुक-अमुक पर दुष्कर्म-छेड़छाड़ का फर्जी मामला दर्ज कराया था। विष-कन्या ने साथ ही फर्जी मामले में एफआर के बावजूद, सहमति के बगैर वकालतनामा दाखिल करने के जुर्म में एक अधिवक्ता के खिलाफ कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है। प्रारंभिक पड़ताल में मालूम हुआ है कि, अधिवक्ता की जानकारी के बगैर फर्जी हस्ताक्षर से वकालतनामा दाखिल किया गया था, ताकि वक्त-बेवक्त रवि सतीजा से रंगदारी वसूलने का विकल्प मौजूद रहे।

फर्जी आरोप मढ़ने वाली को पुलिस ने बताया बहू
याद कीजिए, दिनांक 04 दिसंबर 2024 को भाजपा नेता और होटल कारोबारी पर नाबालिग लड़की ने नौकरी के नाम पर होटल बुलाकर दुष्कर्म करने का आरोप मढ़ा था। बर्रा थाने में एफआईआर दर्ज हुई और पुलिस जांच में पीड़ित लड़की को रवि सतीजा की बहू घोषित कर दिया गया था। रवि ने जिंदगी को मौत के हवाले करने का फैसला कर लिया था, लेकिन परिजनों-दोस्तों के समझाने पर फर्जी इल्जाम के खिलाफ जंग छेड़ी तो साकेत दरबार ने पचास लाख की रंगदारी अदा करने पर मामला खत्म कराने वादा किया था। लंबी लड़ाई के बाद रवि सतीजा को इंसाफ मिला और उन्होंने अखिलेश दुबे, लवी मिश्रा, निशा कुमारी, गीता कुमारी, शैलेंद्र उर्फ टोनू यादव, विमल यादव, अभिषेक बाजपेई के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस की पड़ताल में साबित हुआ कि, निशा और गीता सरीखी कई लड़कियां सिंडिकेट के लिए काम करती हैं, जिन्हें उस्मानपुर में रहने वाला शैलेंद्र यादव उर्फ टोनू रुपए का लालच देकर फर्जी इल्जाम लगाने के लिए तैयार करता था। हाई-प्रोफाइल लड़कियों को दरबार से जुड़ा कर्मचारी नेता बुलाया था। एक विष-कन्या को मिस यूपी का सपना दिखाकर गैंग और विकास समिति से जोड़ा गया था।

बरगलाने पर मढ़ा था रवि सतीजा पर इल्जाम
रवि सतीजा पर फर्जी आरोप मढ़ने वाली उस्मानपुर कच्ची बस्ती की निशा ने कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराते हुए इकबालिया बयान दिया है कि, वह बिहार के छपरा जिले के मसरख थाना के मुंगरहा मूल निवासी है, लेकिन कानपुर में उस्मानपुर कच्ची बस्ती में रहती है। निशा के मुताबिक, कुछ लोगों के बरगलाने पर उसने 04 दिसंबर 2024 को बर्रा थाने में रवि सतीजा के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, निशा और उसकी बहन गीता ने सरकारी गवाह बनने की इच्छा जाहिर करते हुए दुष्कर्म के फर्जी मुकदमों की कहानी को सिलसिलेवार बयां किया है। दोनों बहनों की भूमिका विष-कन्या के रूप में थी, जिसे टोनू यादव पैसों का लालच देकर फर्जी मुकदमों के लिए रजामंद करता था। सूत्रों के मुताबिक, दोनों विष-कन्याओं ने सिंडिकेट से जुड़ी कई अन्य विष-कन्याओं के बारे में चौंकाने वाला खुलासा किया है।

अधिवक्ता पर इल्जाम, लेकिन उसे भी फंसाया गया था
निशा ने अपनी एफआईआर में कचहरी के अधिवक्ता बिलाल आलम पर आरोप लगाया है कि, फर्जी मुकदमे में एफआर लगने के बावजूद, 05 जून 2025 को अधिवक्ता ने सहमति के बगैर उसके फर्जी दस्तखत बनाकर वकालतनामा दाखिल किया है। निशा का दावा है कि, एफआर के बाद उन्होंने पैरवी के लिए किसी अधिवक्ता से संपर्क नहीं किया था, साथ ही बिलाल आलम नामक अधिवक्ता को जानती भी नहीं है। पुलिस ने नवाबगंज निवासी अधिवक्ता को पूछताछ के लिए बुलाया तो साबित हुआ कि, किसी ने बिलाल आलम का वकालतनामा चोरी-चुपके हासिल करने के बाद वकील और पीड़ित के फर्जी दस्तखत बनाकर अदालत में दाखिल किया था। हैंड-राइटिंग में अंतर मिलने के बाद पुलिस ने अधिवक्ता को लौटा दिया। इस संदर्भ में तमाम प्रयास और वाट्सएप पर मैसेज के बावजूद, अधिवक्ता बिलाल आलम से संपर्क मुमकिन नहीं हुआ।

एफआर के बाद होता था प्रोटेस्ट का खेल
गौरतलब है कि, दुष्कर्म का फर्जी मामला दर्ज कराने के बाद अखिलेश दुबे सिंडिकेट शिकार को दरबार में बुलाकर रंगदारी मांगता था, अथवा वांछित जमीन को औने-पौने पर खरीदने की कोशिश करता था। वसूली के बाद आरोप मढ़ने वाली महिला पुलिस के सामने और अदालत में 164 का बयान देने हाजिर नहीं होती थी, ऐसे में मामले में दरबारी इंस्पेक्टर एफआर लगा देता था। शिकार सदैव दरबार में सिर झुकाकर सलामी लगाता रहे, लिहाजा किसी अधिवक्ता का वकालतनामा लगाकर एफआर के बावजूद मामले को कोर्ट में प्रोटेस्ट किया जाता था। रवि सतीजा मामले में मामला उलझने लगा तो सिंडिकेट ने अपने गुट के अधिवक्ता के बजाय बिलाल आलम का वकालतनामा चोरी-चुपके हासिल किया और फर्जी दस्तखत बनाकर प्रोटेस्ट दाखिल कर दिया था।

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