
लखनऊ। पूर्वांचल के वरिष्ठ पत्रकार सिंहासन सिंह यादव ने युवा पत्रकारों का आह्वान करते हुए कहा कि वे पत्रकारिता के प्रति गंभीर रहें और अपनी नैतिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि समय के साथ पत्रकारिता के माध्यम भले बदल जाएं, लेकिन इसके मूल मूल्यों से कभी समझौता नहीं होना चाहिए।

कंटेंट और कंसर्न के बीच का द्वंद्व: सूचना के शोर और सोशल मीडिया के इस दौर में, जहाँ डिजिटल दबाव हावी है, वहां नवोदित पत्रकारों के सामने अक्सर यह असमंजस रहता है कि पत्रकारिता केवल एक ‘कंटेंट’ है या समाज के प्रति ‘कंसर्न’ (सरोकार)। श्री यादव के अनुसार, तकनीक और माध्यम बदलने के बावजूद सत्य, संतुलन और जनपक्ष जैसे बुनियादी सिद्धांत आज भी अटल हैं।
चार दशकों का सफर: 4 जनवरी 1957 को चंदौली के नादी गांव में जन्मे श्री यादव ने वर्ष 1978 से गाजीपुर को अपनी कर्मभूमि बनाया। चार दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने पत्रकारिता को न तो सत्ता का अनुगामी बनने दिया और न ही बाजार का उपकरण। देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं देते हुए उन्होंने हमेशा खबरों की विश्वसनीयता और भाषा की मर्यादा को सर्वोपरि रखा।
युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा: जब पत्रकारिता टीआरपी और ‘वायरल’ होने की होड़ से गुजर रही है, तब सिंहासन सिंह यादव निष्पक्षता और सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करते हैं। उनका मानना है कि खबर का ‘सिर्फ पहले’ होना जरूरी नहीं है, बल्कि उसका ‘सही’ होना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उनके विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है।










