
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने अजमेर शरीफ दरगाह में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के वार्षिक उर्स पर प्रधानमंत्री कार्यालय और दूसरे संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों की ओर से चादर चढ़ाए जाने की परंपरा को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश दिया।
याचिका में कहा गया था कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को दिया जा रहा यह सरकारी संरक्षण और सम्मान असंवैधानिक, मनमाना, ऐतिहासिक रूप से आधारहीन और भारत गणराज्य की संवैधानिक भावना एवं संप्रभुता के विपरीत है। यह याचिका विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह बिसेन और हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की ओर से दाखिल की गई थी।
इसके पहले 22 दिसंबर 2025 को उच्चतम न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ाने से रोकने की मांग पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। 22 दिसंबर को ही प्रधानमंत्री की ओर से अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ायी थी। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री की ओर से अजमेर शरीफ दरगाह में चादर चढ़ाने की परंपरा है।















