
उत्तराखंड : उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन मुफ्ती शमून काजमी ने आज संसद में पेश होने वाले वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक उन मुसलमानों के लिए उम्मीद का एक नया रास्ता खोलता है जो दशकों से राजनीति के खेल में फंसे हुए थे। काजमी का कहना था कि कांग्रेस ने हमेशा मुसलमानों को वोट बैंक बनाने के लिए उनका शोषण किया, जबकि वक्फ संपत्तियों को कभी भी गरीबों के भले के लिए नहीं इस्तेमाल किया गया। इसके बजाय, इन संपत्तियों पर बड़े मॉल और कार्यालय बनाए गए, जो मुसलमानों के अधिकारों की उपेक्षा करने का प्रतीक बने। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के नेता मुसलमानों को शिक्षा से वंचित रखने में भी शामिल थे।
शादाब शम्स की उम्मीदें
वहीं, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने वक्फ संशोधन विधेयक पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने इसे ‘उम्मीद’ के नाम से संबोधित किया, जो गरीब मुसलमानों के लिए एक नई रोशनी हो सकती है। शम्स ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को इस विधेयक के लिए उम्मीद की किरण बताया और कहा कि मोदी सरकार ने फैसला लिया है कि गरीब मुसलमानों को मुख्यधारा में लाया जाएगा। उन्होंने इसे ’70 साल बनाम मोदी कार्यकाल’ की तुलना में रखा, जहां विपक्ष ने अपने शासन में वक्फ संपत्तियों को लूटा, जबकि मोदी सरकार ने इसे सही दिशा में लाने का काम किया है।
विरोध और आरोप
शादाब शम्स ने यह भी आरोप लगाया कि जो लोग इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं, वे असल में मुसलमान नहीं हैं। वे राजनीतिक मुसलमान हैं जो कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और जनता दल के समर्थन से इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। उनके पीछे जमीयत उलेमा-ए-हिंद और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संगठन हैं, जो वक्फ लाभार्थी हैं और अपने हितों की रक्षा के लिए इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी पर विश्वास
शम्स ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक्फ संशोधन विधेयक को पारित करवा कर गरीब मुसलमानों को उनका अधिकार दिलाएंगे। उनके अनुसार, यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के गलत उपयोग को रोकने और इन संपत्तियों का सही तरीके से लाभ उन तक पहुंचाने का एक बड़ा कदम है।