यूपी के इस शहर में घुल रहा पानी में ‘धीमा जहर’, 10 लाख लोगों की जान खतरे में…

Noida : गौतमबुद्ध नगर में गंभीर जल प्रदूषण का संकट गहरा रहा है। यहाँ 10 लाख से अधिक लोग रसायनों और मल-मूत्र से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। अवैध डाइंग उद्योगों द्वारा हरनंदी नदी और जमीन में छोड़े जा रहे रासायनिक अपशिष्ट के कारण भूजल विषैला हो चुका है। अधिकारियों की मिलीभगत से यह ‘धीमा जहर’ फैल रहा है, जिसके परिणामस्वरूप कैंसर, टाइफाइड और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जो क्षेत्र में एक बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा कर रही हैं।

गांव-गांव में जहरीला पानी का जहर

नोएडा शहर के सबसे बड़े संकट में गौतमबुद्ध नगर की हरनंदी नदी के किनारे बसे दो दर्जन से अधिक गांव और कॉलोनियां हैं। इन क्षेत्रों में लाखों लोग रोजाना रसायनिक और मल-मूत्रयुक्त पानी पी रहे हैं। छजारसी, चोटपुर, यूसुफपुर चक साबेरी, बहलोलपुर, गढ़ी चौखंडी, ककराला, नया गांव, सलारपुर, हाजीपुर और अन्य गांवों में 150 से अधिक अवैध डाइंग उद्योग बेहिचक रसायनिक अपशिष्ट जमीन और नदी में छोड़ रहे हैं।

प्राधिकरण की आपूर्ति नाकाफी होने के कारण शत-प्रतिशत आबादी भूजल पर निर्भर है, जो अब विषैला हो चुका है। घरों के पंपों से निकलने वाला पानी रसायनों से भरपूर है, जिससे कैंसर, टाइफाइड और हेपेटाइटिस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जिम्मेदार अधिकारी इन उद्योगों से हर महीने मोटी रकम लेकर उन्हें जहर फैलाने की खुली छूट दे रहे हैं। गौतमबुद्ध नगर की लगभग 70 प्रतिशत आबादी अभी भी भूजल पर निर्भर है।

आसपास के गांवों में बीमारी का कहर

दुजाना गांव के 20 हजार की आबादी में पिछले एक दशक में कैंसर और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों ने कहर बरपाया है। आरोप है कि फैक्ट्रियों के रसायनिक पानी को चोरी-छिपे जमीन के गर्त में डाला जा रहा है, जिसकी टीडीएस (टोटल डाइजेस्टिबल सॉलिड) मानक से करीब आठ सौ के आसपास है। इस प्रदूषण के कारण गांव में ही 60 से अधिक मरीज कैंसर, किडनी व हेपेटाइटिस से जूझ रहे हैं। हाल ही में 20 से अधिक लोगों की मौत भी हो चुकी है।

महिलाओं में बढ़ रहा गर्भाशय कैंसर

मोमनाथल गांव में भूजल रसायनिक होने से महिलाओं में गर्भाशय कैंसर का खतरा बढ़ गया है। कई युवतियों में भी इस बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इलाज के दौरान कई महिलाओं का गर्भाशय निकालना पड़ा है। इस समस्या को देख गांव में गंगाजल की पाइपलाइन पहुंचाई गई है और घर-घर में पानी का कनेक्शन दिया जाने लगा है।

घर के नलों से मल-मूत्र की गंध

कोलोनियों में सीवरेज व्यवस्था का अभाव है। मल-मूत्र नालियों में बहता है और जलाशयों या जमीन में रुककर भूगर्भ में मिल जाता है। लाखों की आबादी इस दूषित पानी को पी रही है। शहर में मौजूद नोएडा प्राधिकरण के 300 बोरवेल पूरे शहर में पानी की आपूर्ति करते हैं, जिनसे भी गंध और शिकायतें मिलती हैं।

डाइंग उद्योगों से निकलने वाले रासायनिक पानी में एजो डाईज, रिएक्टिव डाईज, डिस्पर्स डाईज, सोडियम क्लोराइड, सोडियम सल्फेट, कास्टिक सोडा, सल्फ्यूरिक और एसिटिक एसिड, क्रोमियम, कॉपर, जिंक, सर्फेक्टेंट्स, डिटर्जेंट, हाइड्रोजन पेरोक्साइड जैसे खतरनाक रसायन शामिल हैं। ये रसायन सूर्य की रोशनी को नदी में प्रवेश करने से रोकते हैं, जिससे प्रकाश संश्लेषण रुकता है और ऑक्सीजन की मात्रा घटती है। जलीय जीव मरने लगते हैं और भूगर्भ में रसायनों का स्तर बढ़ता है, जिससे पानी का टीडीएस काफी बढ़ जाता है।

प्रति दिन 75 लाख लीटर प्रदूषित पानी

डाइंग उद्योगों से हर दिन करीब 75 लाख लीटर रसायनिक पानी निकलकर हरनंदी नदी और जमीन में मिल रहा है। इनमें से एक उद्योग से रोजाना 50 हजार लीटर पानी निकलता है। यह रंगीन पानी कपड़ों पर पूरी तरह नहीं चढ़ पाता है और नालियों और बोरवेल के जरिए उद्योग संचालक नदी और भूगर्भ में मिला रहे हैं।

पिछले दो-तीन महीनों में ही 20 लोग कैंसर और किडनी जैसी घातक बीमारियों के कारण जान गंवा चुके हैं। वर्तमान में गांव में 60 से अधिक कैंसर, किडनी और हेपेटाइटिस के मरीज हैं। दुजाना गांव के 20 हजार लोगों में कैंसर के 60 से अधिक मरीज हैं और हाल ही में 20 से अधिक मौतें हुई हैं।

छजारसी कॉलोनी में रहने वाली बाला देवी कहती हैं कि दो साल पहले उन्हें कैंसर का पता चला। पानी बहुत प्रदूषित है, आरओ भी ठीक से काम नहीं करता। इसी तरह, महीपाल चौधरी का कहना है कि पिछले छह महीनों में 10 से अधिक मौतें कैंसर से हो चुकी हैं।

गांव में पानी का टीडीएस अभी भी करीब 800 है। अधिकांश घरों में आरओ लगे हैं, लेकिन लोग मजबूरी में बोतलबंद पानी खरीदकर पी रहे हैं। सरकार ने कुछ जल टंकी भी लगाई है, लेकिन वह घर-घर तक नहीं पहुंच पा रही है।

मवेशियों का गर्भधारण समय से पहले हो जाना, बच्चे अंधे और विकलांग होना जैसी बातें भी सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नालियों का कोई निकास व्यवस्था नहीं है और उद्योग बंद होने के बावजूद गंदगी फैलने का सिलसिला जारी है।

डाइंग उद्योगों से जुड़ी शिकायतें लगातार हो रही हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई से बच रहे हैं। सीडीओ गौतमबुद्ध नगर डॉ. शिवाकांत द्विवेदी ने कहा है कि यदि जरूरी हुआ तो पानी की गुणवत्ता जांच के लिए सर्वे कराएंगे।

छजारसी कॉलोनी की बाला देवी कहती हैं कि दो साल पहले कैंसर का इलाज कराकर घर वापस आई हैं। पानी की गुणवत्ता बहुत खराब है, और उद्योगों से प्रदूषित पानी का स्तर बढ़ रहा है। रतनपाल यादव बताते हैं कि जानवर भी प्रभावित हैं, उनके बच्चे अंधे और विकलांग हो रहे हैं।

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