Sitapur : अटरिया में हरियाली का महाविनाश, लकड़ी माफिया और सिस्टम के गठजोड़ ने उजाड़े बाग

  • कागजी परमिट की आड़ में औषधीय पेड़ों का कत्लेआम, रामसेवक वर्मा के रसूख पर उठे सवाल

Atria, Sitapur : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहाँ एक ओर प्रदेश को हरा-भरा बनाने के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं सीतापुर की सिधौली रेंज के अटरिया क्षेत्र में पर्यावरण का सीना छलनी किया जा रहा है। यहाँ लकड़ी माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि ‘इलेक्ट्रॉनिक आरे’ की गड़गड़ाहट के बीच फलदार और औषधीय पेड़ों को धड़ल्ले से नोटों में तब्दील किया जा रहा है।
इन गांवों में चला माफियाओं का आरा

वन विभाग और स्थानीय पुलिस की कथित मौन सहमति के बीच अटरिया के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध कटान की खबरें सामने आई हैं। नहर किनारे खड़े औषधीय गुणों वाले नीम और गूलर के पेड़ों को बेरहमी से काट दिया गया। अटरिया थाने से महज चंद कदमों की दूरी पर स्थित देसी शराब की दुकान के पास खुलेआम पेड़ों पर कुल्हाड़ी चली, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अनजान बने रहे। यहाँ मंदिर जैसे पवित्र स्थान के पास खड़े प्राचीन और पूजनीय पेड़ों को भी माफियाओं ने नहीं बख्शा। सूत्रों के हवाले से वन विभाग के भीतर चल रहे एक बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है। आरोप है कि अधिकारियों की आँखों में धूल झोंकने के लिए परमिट तो पाटिन या कलमी पेड़ों का लिया जाता है, लेकिन उसकी आड़ में सदियों पुराने मोटे और औषधीय पेड़ों को जमींदोज कर दिया जाता है। कम पेड़ों के परमिट पर दोगुने पेड़ काटना यहाँ की अघोषित नीति बन चुकी है।

दशकों से जमे अधिकारियों पर गंभीर आरोपरू इस पूरे प्रकरण में सिधौली रेंज के वाइट प्रभारी रामसेवक वर्मा का नाम सुर्खियों में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे बीते 10 वर्षों से एक ही जनपद और एक ही बीट में अंगद के पैर की तरह जमे हुए हैं। पूर्व में समाचार पत्रों में खबरें छपने और स्पष्टीकरण मांगे जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होना, माफिया-अधिकारी गठजोड़ की ओर इशारा करता है। क्षेत्र में हो रही इस अंधेरगर्दी ने शासन के श्पर्यावरण संरक्षणश् के दावों पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

खबरें और भी हैं...

अपना शहर चुनें