
- जन्मदिन को बनाया विषेश, जेसी के लोगों ने दिखाई बीजेपी के खिलाफ एकजुटता
- पूर्व एमएलसी जयेश प्रसाद के जन्मदिवस पर बिना आयोजन के प्रसाद भवन में उमड़े समर्थक
Shahjahanpur : बात यूपी के शाहजहांपुर की है जहां जनपद की राजनीतिक धुरी कही जाने वाली कोठी आज भी किसी राजनीति की मोहताज नहीं है। एक तरफ जहां पूर्व एमएलसी जयेश प्रसाद के आवास पर सपा मुखिया पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शिरकत कर चुके हैं तो वहीं दूसरी ओर देश राजनीति में शाहजहांपुर का नाम रोशन कर रहे केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद की कोठी पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ शिरकत कर चुके हैं। इसलिए उनके बारे में कोई राजनीतिक विश्लेषण किया जाए तो वह किसी निश्चित दायरे तक सीमित नहीं है। क्योंकि जनपद के ज्यादातर नेताओं की डिग्रियां यहीं से बनी हैं। आज कोई भी नेता किसी पार्टी में सहभागिता निभा रहा हो वह अलग बात है।
कौन हैं जेसी बाबा उर्फ जयेश प्रसाद……?

शाहजहांपुर पीलीभीत से 2004 से 2016 तक एमएलसी रहे जयेश प्रसाद को जेसी बाबा के नाम से भी जाना जाता है। वर्तमान में जब सत्ताधारी बीजेपी के खिलाफ लोग और नेता बोलने से डरते हैं तो वहीं जेसी बाबा लगातार आरोप प्रत्यारोप लगाते हुए कई मामलों की शिकायत करते हैं भ्रष्टाचार की जांचे भी कराने से नहीं इतराते हैं। यही वजह है कि जनपद ही नहीं वल्कि प्रदेश में भी उन्हें सपा के कद्दावर नेता के तौर पर भी पहचाना जाता है। उनका राजनीतिक ओहदा क्या है यह किसी से छुपा नहीं है।
जनपद में जेसी बाबा कोई ऐसा नाम नहीं है जो कि पहचान का मोहताज हो जेसी वह नाम है जो खुद में राजनीतिक बादशाह है। जेसी बाबा के लिए वर्तमान की राजनीति भी कोई नया खेल नहीं है यह उनके पैतृक देन है जिसमें उन्होंने कभी भी अपने उसूलों से समझौता नहीं किया है यही वजह है कि आज भी उनके हजारों समर्थक उनके साथ खड़े दिखाई देते हैं।
जेसी का जन्मदिन आखिर क्यों बन गया विशेष…..?

पूर्व एमएलसी जयेश प्रसाद जेसी बाबा का शनिवार को जन्मदिन था । जिसकी न कोई तैयारी थी न ही उसका कोई कार्यक्रम रखा गया था। सैकड़ों समर्थक अचानक केक लेकर कोठी पहुंचे जहां जेबी बाबा को देखकर जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए जिंदाबाद के नारे लगाने लगे और जेसी बाबा के साथ उनके आवास पर ही केक काटकर जन्मदिन मनाया। इस दौरान उनके जन्मदिन पर जनपद में सोशल मीडिया से लेकर उनके आवास तक जन्मदिन की बधाई देने वालों की ऐसी होड़ मची रही जैसे किसी कैबिनेट मंत्री आदि का स्वागत और बधाइयां दी जा रही हों। जिसकी चर्चाएं अन्य दल के नेताओं में भी काफी सुनने को मिली।
सियासी गलियारों में गर्माया माहौल जेसी बाबा की बढ़ी मांग

पूर्व एमएलसी जयेश प्रसाद के जन्मदिवस के अवसर पर शनिवार को प्रसाद भवन में समर्थक उमड़े और सुबह से ही शुभकामनाएं देने वालों का तांता लगा रहा। हाल यह रहा कि लोगों को बधाई देने के लिए बुजुर्ग आशीर्वाद लेकर पहुंचे तो युवा नई उम्मीदों के साथ दिखाई दिए। वहीं कई लोग ऐसे भी थे, जो केवल एक मुस्कान और आत्मीय अभिवादन के लिए आए। यह भीड़ केवल औपचारिक शुभकामनाओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि वर्षों की सार्वजनिक सेवा, सादगी और हर समय उपलब्ध रहने की छवि पर जताए गए भरोसे का प्रतीक थी। जन्मदिवस तो महज एक अवसर था, असल वजह वह अपनापन और विश्वास रहा, जिसने जयेश प्रसाद को जनता से जोड़े रखा है। पूरे दिन प्रसाद भवन में मिलन, संवाद और आत्मीयता का माहौल बना रहा।यूपी के शाहजहांपुर में सपा से पूर्व एमएलसी जयेश प्रसाद का जन्मदिवस है ऐसे में अज़ीज़ो से लेकर समर्थकों का शुभकामनाएं देना लाज़मी है।

लेकिन प्रसाद आवास पर शुभकामनाएं देने वालों से कहीं ज्यादा सियासी गलियारों में चर्चा का विषय रहा और हो भी क्यों न,चेहरा ऐसी शख्सियत का जो बड़े बड़े नेताओं के लिए चुनावी चुनौती बन सकता है। जिसमें महानगर के ब्राह्मणों के साथ मुस्लिम और यादव कश्यप कुर्मी कुशवाहा ठाकुर आदि जयेश प्रसाद का वोट बैंक रहा है। जिसके चलते सत्ताधारी पार्टी को एक नया टेंशन जरूर मिलता दिखाई देने लगा है।
ब्राह्मणों में भी कद्दावर नेताओं के तौर पर शुमार जेसी का नाम
जयेश प्रसाद किसी एक वर्ग विशेष के लिए नहीं वल्कि जनपद के हर तबके के लोगों के साथ जुड़े रहे हैं उनके लिए काम किया है। हालांकि उन्हें एक बड़े ब्राह्मण नेता के तौर पर भी पहचाना जाता है। पिछले विधानसभा चुनाव में जयेश प्रसाद ने ब्राह्मणों पर लगातार हो रहे अत्याचार और एकतरफा कार्यवाहियों को लेकर सत्ताधारी पार्टी को घेरा था । इस दौरान उन्होंने ब्राह्मण संगठन चलाकर सत्ताधारी पार्टी की उंगली पर नाचने वाले नेताओं पर भी तंज कसते हुए कहा था कि कुछ लोग रिटायर होने बाद ब्राह्मण संगठन चलाते हैं और फिर ब्राह्मणों का सौदा करके उनकी आवाज को ही दबाने वाले लोगों का साथ देते हैं। हमें ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।
जेसी की राजनीतिक विश्लेषण में बीता हुआ कल
बात बीते वर्ष 04 जून 2024 की ही तो है जिस चुनाव की निर्विरोध होने की बिसातें बिछी थीं कि पूर्व एमएलसी की एक चाल ने मुखिया तक के होश उड़ा दिए। सपा मुखिया को बात समझ में आई और तत्काल नया प्रत्याशी मैदान में उतारा ,अब दिन रहे गए थे चंद और साख दाव पर लगी थी। मेहनत रंग लायी जो चुनाव पहले निर्विरोध होने की कगार पर था उसमें नए प्रत्याशी ज्योत्सना कश्यप की एंट्री ने तूफ़ान खड़ा कर दिया और टक्कर भी जबरदस्त हुई। पांच लाख की जीत का दावा ठोकने वाले कद्दावर के प्रत्याशी की जीत महज 56 हजार वोटों में दर्ज की गयी,अब यह बात थी प्रत्याशी को लड़वाने की।
सोचिए एक तरफ ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में सवा लाख से ज्यादा वोटरों की कटौती और उस पर बाज़ीगर अगर मैदान में आ जाएं ऐसे में तस्वीर का रुख बदल भी सकता है।
अब गंगाधर की असलियत जगजाहिर होने पर उन पर मुखिया के विश्वास में कमी देखने को मिल रही है और इधर एमएलसी जयेश प्रसाद के जन्मदिन ने तो नए कयासों को जन्म दे दिया है।
बहरहाल ड्राफ्ट वोटर सूची में सवा लाख से ज्यादा वोटरों की कटौती और नए हिन्दू चेहरे की चर्चाएं कहीं चुनावी समीकरण के बदलने की ओर इशारा तो नहीं कर रहीं हैं।
वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर चर्चाएं तेज
वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों की बात की जाए तो ब्राह्मण एक तरफ जहां सपा से पहले ही खफा था तो वहीं अब बीजेपी से भी बेहद खफा नजर आ रहा है। परिस्थितियों की दृष्टि से देखा जाए तो शाहजहांपुर जनपद में ब्राह्मणों की आवाज को उठाने के लिए जयेश प्रसाद को ब्राह्मणों का समर्थन बढ़ता जा रहा है लगातार उन्हें राजनीतिक हस्तक्षेत करने के साथ राजनीतिक हिस्सेदारी और भागीदारी करने को लेकर लागतार समर्थकों द्वारा उत्साहवर्धन किया जा रहा है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो जयेश प्रसाद की इंट्री महानगर में होते ही सत्ताधारी पार्टी के किले पर भी कब्जा किया जा सकता है । उनके हस्तक्षेप से आने वाले विधानसभा चुनाव में शाहजहांपुर जनपद ही नहीं वल्कि पीलीभीत जिले में भी उथल पुथल देखने मिल सकती है। जिसका प्रमुख कारण जयेश प्रसाद का ब्राह्मणों के साथ ठाकुर वोटरों पर अच्छा खास प्रभाव माना जाता है।










