शाहजहांपुर: वक्फ बोर्ड बिल पर क्या बोले जनपद के लोग किसको होगा फायदा !

शाहजहांपुर । शाहजहांपुर के लोगों में बक्फ बोर्ड बिल को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एक तरफ जहां जानकार वक्फ बोर्ड संशोधन बिल का समर्थन कर रहे हैं । तो वहीं कुछ लोग अंदुरुनी वक्फ विधेयक से नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।

महानगर सहित तिलहर, कटरा, जलालाबाद, कांट , खैरपुर क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र हैं। जहां दैनिक भास्कर की टीम ने लोगों से वक्फ बोर्ड विधेयक के बारे में जानने की कोशिश तो कुछ लोग इस पर बात करना ही उचित नहीं समझा। कुछ लोगों ने अपने विचार रखे जिसमें कुछ लोगों ने सही तो कुछ ने वक्फ बोर्ड संशोधन बिल को गलत बताया है।

“क्या है वक्फ बोर्ड बिल का मामला”

वक्फ बोर्ड मुस्लिम समुदाय का एक ऐसा बोर्ड है जो कभी भी किसी भी जमीन को अपना बता सकता है जिस पर वक्फ बोर्ड दावा करता है उसकी शिकायत किसी अन्य अदालत में नहीं की जा सकती है। वक्फ बोर्ड से संबंधित शिकायत वक्फ बोर्ड में ही दायर की जा सकती है जहां मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा ही जैसा फैसला सुनाया जाता है उसे ही मान्य करना पड़ता है ।

वक्फ बोर्ड ने देश के अंदर ऐसी लाखों बीघा जमीन पर अपना दावा किया है जिनपर मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे से लेकर स्कूल कॉलेज और मकान दुकानें बनी हुई हैं। वक्फ बोर्ड उनको कभी भी खाली करने का नोटिक दे सकता था ।

लगातार वक्फ बोर्ड द्वारा मनमाने तरीके से संपत्ति को बढ़ावा देने जैसा गलत नीतियां देश के लिए गलत संदेश दे रही थीं। जिसे केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पारित किया । इस दौरान वक्फ बोर्ड संशोधन बिल का देश की कांग्रेस सपा सहित सभी विरोधी पार्टियों ने बिल का खुलकर विरोध किया ।

लोकसभा से पारित होने के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया गया, जहां करीब 12 घंटे की लंबी बहस के बाद इसे मंजूरी मिल गई। राज्यसभा में इस बिल के पक्ष में 128 वोट पड़े, जबकि 95 सांसदों ने इसका विरोध किया। इससे पहले लोकसभा में इस बिल को 288 सांसदों का समर्थन मिला था, जबकि 232 ने इसके खिलाफ मतदान किया था। अब जब यह विधेयक संसद के दोनों सदनों में पास हो चुका है, तो इसे कानून बनने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है, जिसके बाद यह औपचारिक रूप से लागू हो जाएगा।

मोदी सरकार की ओर से यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन में सुधार के उद्देश्य से लाया गया है, लेकिन इसे लेकर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिला। विपक्षी दलों ने इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों के खिलाफ बताया, जबकि सरकार ने इसे पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम करार दिया। राज्यसभा में चर्चा के दौरान डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने इसमें संशोधन की मांग करते हुए डिवीजन की अपील भी की, हालांकि सरकार ने अपने रुख पर कायम रहते हुए विधेयक को पारित करा लिया।

जानकारों की मानें तो वक्फ बोर्ड की संपत्तियां वक्फ बोर्ड से जुड़े लोग, मुतवल्ली आदि अपने निजी लाभ के लिए उपयोग कर रहे हैं। नए संशोधन के बाद जिन संपत्तियों पर कोई कानूनी बाद चल रहा है उसे पर न्यायालय और प्रशासन संज्ञान लेने की स्थिति में आ गई है। जिन संपत्तियों पर कोई विवाद नहीं है उन संपत्तियों पर कोई भी परिवर्तन नहीं होगा, वह सुरक्षित हैं।

कौन क्या बोला आइए जानते हैं लोगों की राय –

जनपद के साथ पूरे देश के वरिष्ठ स्तंभकार के साथ संवैधानिक विषयों के जानकर अमित त्यागी बताते हैं कि संविधान के अनुच्छेद 25/28 धार्मिक स्वतंत्रता के पैरोकार हैं, धर्म के नाम पर किसी भी तरह का अतिक्रमण इसमें शामिल नहीं है। वक्फ संशोधन की व्यापकता को समझने के लिए इसके धार्मिक दृष्टिकोण से अलग दीवानी वाद के संदर्भ को समझना होगा। धर्म की आड़ में जमीनों पर कब्जे, उसका दुरुपयोग एवं बंदरबाट क़ौम के साथ गद्दारी भी है और असंवैधानिक भी। अगले कुछ सालों में मुस्लिम स्वयं इस संशोधन की सराहना करते दिखेंगे।

कटरा नगर पालिका परिषद के पूर्व चेयरमैन शमी उस्सान खान ने बताया कि भारत सरकार द्वारा जो वक्फ को लेकर कानून बनाया गया है बह पूरी तरह से बेबुनियाद है बक्फ बोर्ड के लिए किसी और कानून की आवश्यकता ही नहीं है।

वहीं विश्व हिंदू परिषद के विभाग मंत्री अशनील सिंह ने बताया कि भारत में किसी को भी धर्म की स्वतंत्रता पूर्ण रूपेण प्राप्त नहीं है। संविधान में धर्म की स्वतंत्रता लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य तथा अन्य व्यक्तियों के मूल अधिकार के अधीन होकर सभी को प्राप्त है, कोई भी धर्म की स्वतंत्रता की मांग इस तरह नहीं कर सकता कि उससे लोक व्यवस्था आदि पर खराब असर पड़े। वक्फ संसोधन अधिनियम का उद्देश्य वक्फ बनाने की स्वतंत्रता को रोकना नहीं बल्कि संपत्तियों के कुप्रबंधन को रोकना है इसलिए वक्फ संशोधन अधिनियम पूरी तरह संविधान सम्मत और ठीक है।

हिंदू जागरण मंच के महानगर जिलाध्यक्ष राजेश अवस्थी ने कहा कि वक्फ बोर्ड लगातार हिंदुओं की जमीन पर अपना दावा करता आ रहा था, जिसमें अब पूरी तरह से रोक लगेगी। वक्फ बोर्ड में अन्य धर्म के लोगों की नियुक्ति से वक्फ बोर्ड की मनमानी नहीं चल पाएगी। सरकार ने जो कदम आज उठाए हैं वह बहुत पहले उठाना चाहिए था।

समाजसेवी सगीर खान का मत है कि सरकार द्वारा वक्फ को लेकर जो कानून उससे मुस्लिम समाज को ही नही अन्य धर्मों के लिए भी हितकर नहीं है । बहुत से चर्च और गुरुद्वारा भी वक्फ की जमीनों पर बने हैं।

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