
- शाहजहांपुर :जर्जर आंगनवाड़ी केंद्र में रखे जा रहे गोबर के उपले और बांधे जा रहे मवेशी
- जलालाबाद साल भर से नहीं पहुंची आगनवाड़ी कार्यकत्री, नहीं बंटा पुष्टाहार
शाहजहांपुर। एक तरफ जहां आंगनवाड़ी केंद्र की हालत खस्ताहाल है तो वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों उसके अंदर गोबर के उपले लगाए बैठे हैं। इसी टूटी जर्जर बिल्डिंग और उसमें रखे उपले के बीच बच्चों के लिए बैठने की व्यवस्था है। अब बच्चे बैठ भी जाएं तो क्या समस्या कम तो नहीं हो सकती है क्योंकि बच्चों को पढ़ाने के लिए जो आंगनवाड़ी लगाई गईं वह महीनों गायब रहती हैं उन्हें ड्यूटी से कोई सरोकार ही नजर नहीं आ रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक सरकार की कल्याणकारी योजना में जिस तरीके से लाखों रुपयों का खर्च किया जा रहा है उसमें पलीता लगाने में आंगनवाड़ी जैसी कार्यकत्री कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है।मामला जलालाबाद का है जहां एक बर्ष से हो रहा पुष्टाहार वितरण की बात छोड़ो यहां आंगनवाड़ी ड्यूटी तक नहीं आती है।जिसके बाद ग्रामीणों ने आंगनवाड़ी केंद्र को उपलो को रखने के लिए प्रयोग में ले लिया।
जलालाबाद विकास खंड के बझेड़ा महुआ डंडी में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र वर्तमान समय में कूड़ाघर के रूप में तब्दील हो गया है। आसपास का कूड़ा करकट केंद्र के सामने फेंका जा रहा है। जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। केंद्र भी अक्सर बंद रहता है।

लोगों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र में कई महीनों से पुष्टाहार भी नहीं बांटा गया है केंद्र मजाक बनकर रह गया है। वर्तमान में यह कूड़ा निस्तारित करने का घर हो गया है। लोगों ने पूरे मामले में जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
बझेड़ा महुआ डंडी में आंगनबाड़ी केंद्र में आंगनबाड़ी कार्यकत्री भी नहीं जाती हैं। वह आंगनबाड़ी केंद्र में ग्रामीणों द्वारा उपलो का अंबार लगा है। कागजों में आज भी केंद्र सुचारू रूप से चलता है। लेकिन वर्तमान समय में आंगनबाड़ी केंद्र के चारों तरफ झाड़ियां उग आई हैं। साफ-सफाई कभी होती नहीं है। आश्चर्य की बात यह है कि केंद्र के सामने ही ग्राम पंचायत का स्कूल सामने है और बराबर में सचिवालय भी बना है।
वहीं, ग्रामीणों का यह भी कहना है कि ग्राम पंचायत बझेड़ा महुआ डंडी में बच्चों को जो पोषाहार वितरण होता है वह 1 साल पहले हुआ था अभी तक हमारे बच्चों को पोषाहार नहीं दिया गया। वहीं महिलाओं ने यह भी कहा है कि बच्चों को 3 साल तक ही पोषाहार दिया जाता है। 3 साल बाद बोल दिया जाता है कि बच्चा को पोषाहार बंद हो गया है। न ही गर्भवती महिलाओं को भी पोषाहार उपलब्ध कराया जाता है।
आंगनबाड़ी की सुपरवाइजर सुशीला कुशवाहा ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र को आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को हैंडओवर नहीं किया गया था। इसकी खुली बैठक हुई थी डीएम साहब को लेटर भी भेजा जा चुका है।