
Sanjay Singh on Shahrukh Khan : भाजपा नेता और पूर्व विधायक संगीत सोम ने मेरठ के दौराला क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान को देश का गद्दार करार देते हुए विवाद खड़ा कर दिया। अब इस मामले में आप नेता संजय सिंह ने पीएम मोदी को ही घेरे में ले लिया। संजय सिंह ने कहा कि अगर बांग्लादेशी खिलाड़ी को आईपीएल टीम में शामिल कर शाहरुख खान गद्दार हैं तो बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना को भारत में छिपाकर रखना पर पीएम मोदी देशद्रेही क्यों नहीं?
उन्होंने आरोप लगाया कि शाहरुख ने IPL में बांग्लादेशी क्रिकेटर को करोड़ों रुपये देकर खरीदा है, जिसे उन्होंने देशविरोधी गतिविधि बताया। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बवाल मच गया है।
संगीत सोम के इस बयान के बाद, राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई। विपक्ष ने इसे केंद्र सरकार और भाजपा की असहिष्णुता का प्रतीक बताया। कांग्रेस नेता और कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने ट्वीट कर कहा कि IPL में विदेशी खिलाड़ियों की भागीदारी BCCI के नियमों और भारतीय क्रिकेट बोर्ड की मंजूरी के तहत होती है। उन्होंने पूछा कि अगर विदेशी खिलाड़ियों का आना देशद्रोह है, तो फिर BCCI को क्यों अनुमति दी जाती है?
वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सवाल उठाया कि यदि बांग्लादेशी खिलाड़ी रखने पर शाहरुख़ खान देशद्रोही हैं, तो फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से करीबी रिश्तों को क्या कहा जाए? उन्होंने कहा, “दोनों देशों के बीच व्यापार, बिजली आपूर्ति, सुरक्षा सहयोग और उच्च स्तरीय संबंध हैं, तो क्या ये भी देशद्रोह की श्रेणी में आएंगे?”
यह विवाद सिर्फ एक फिल्म स्टार या क्रिकेटर का मामला नहीं है, बल्कि इससे यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि देशभक्ति का मतलब क्या है। क्या विदेशी खिलाड़ियों को IPL में शामिल करना देशद्रोह है? अगर हां, तो क्या ICC के अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह भी देशद्रोही हैं, जिन्होंने क्रिकेट के अंतरराष्ट्रीय मंच का नेतृत्व किया है?
भारतीय कानून में देशद्रोह की परिभाषा बहुत गंभीर है, और सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि असहमति और आलोचना को देशद्रोह नहीं माना जाता। लेकिन इस तरह के बयान राजनीति में नफरत फैलाने का एक हथियार बन गए हैं, जिससे चुनावी माहौल गर्माया जा रहा है।
वहीं, शाहरुख खान ने अभी तक इस पूरे विवाद पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। माना जा रहा है कि वह इस तरह के विवादों में अपनी चुप्पी बनाए रखते हैं, लेकिन राजनीति का यह खेल उनके लिए भी नया नहीं है। जनता सवाल कर रही है कि देशभक्ति का सर्टिफिकेट अब नेता और राजनीतिक दल बांटेंगे या नहीं।
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