
Sambhal : उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर मामले में सर्वे के दौरान हुई हिंसा के संदर्भ में मंगलवार को स्थानीय कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर ने तत्कालीन पुलिस अधिकारी, जैसे सीओ अनुज चौधरी, संभल कोतवाल अनुज तोमर और 15-20 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
यह आदेश उस घायल युवक के पिता की याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया, जो गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुआ था। इस घटना की यादें ताजा हो गई हैं, जिसमें 24 नवंबर 2024 को हिंसा के दौरान चार लोगों की मौत हो गई थी।
पूरा मामला यह है कि 24 नवंबर 2024 को सुबह एक टीम सर्वे के लिए आई थी, जो पहले भी यहां सर्वे कर चुकी थी। जैसे ही इस खबर फैली, माहौल गरम हो गया। स्थानीय लोग विरोध करने लगे और प्रदर्शन उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस टीम पर पथराव किया और आसपास के मकानों से भी पथराव की खबरें आईं। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा, जिसमें गोली चलने का भी मामला सामने आया। इस हिंसा में चार युवकों की मौत हो गई और कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
उस दिन घायल हुए युवक यामीन का पुत्र आलम (23) भी फायरिंग के दौरान घायल हो गया, जिसमें उसकी पीठ और हाथ में गोली लगी थी। उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, और बाद में मेरठ के क्रिटिकल केयर सेंटर में उसका ऑपरेशन हुआ। वकील का दावा है कि पुलिस ने आलम को ही आरोपी बना दिया है, जबकि परिजनों का आरोप है कि उसने अपना इलाज गुपचुप तरीके से कराया।
इस घटना के बाद सरकार ने न्यायिक जांच आयोग और मजिस्ट्रियल जांच कराई, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया कि यह हिंसा कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि एक पूर्व-नियोजित साजिश थी। रिपोर्ट में विदेशी हथियारों और भारी मात्रा में अवैध हथियारों का प्रयोग होने का भी जिक्र है। आयोग ने कहा कि बाहर से असामाजिक तत्वों को बुलाया गया था और हिंसा के दौरान ‘मेड इन यूएसए’ जैसे विदेशी हथियार भी इस्तेमाल किए गए।
संभल एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा है कि गोली लगने वाले युवक की गोली 32 बोर की थी, जिसे पुलिस नहीं चलाती है। पोस्टमार्टम और बैलिस्टिक रिपोर्ट से इसकी पुष्टि हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल युवक की मौत के मामले में मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा, लेकिन कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की जाएगी।
वहीं, कोर्ट ने आदेश दिया है कि 7 दिनों के भीतर पुलिस केस दर्ज कर जांच शुरू करे और इसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे। इस पूरे घटनाक्रम में लंबी कानूनी प्रक्रिया चल रही है, और कोर्ट ने यह चेतावनी दी है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो। यह फैसला हिंसा के पीछे की गहरी साजिश का पर्दाफाश करने का प्रयास माना जा रहा है।
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