राहत भरी खबर : महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट को मिला सुरक्षा कवच, श्रम संहिता के नियम जारी, 1 अप्रैल से लागू!

नई दिल्ली । महिलाओं को रात्रिकालीन पाली (नाइट शिफ्ट) में काम करने की अनुमति देते हुए केंद्र सरकार ने उनकी सुरक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए श्रम संहिता के तहत नए नियम जारी कर दिए हैं। इन नियमों के अनुसार अब महिलाएं शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट शिफ्ट में काम कर सकेंगी, लेकिन इसके लिए नियोक्ता को महिला कर्मचारी की लिखित सहमति लेना अनिवार्य होगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं को नाइट शिफ्ट में कार्य कराने की स्थिति में सुरक्षित और रोशन कार्यस्थल के साथ-साथ उनके आवास से कार्यालय तक आने-जाने के लिए पर्याप्त परिवहन सुविधा भी उपलब्ध करानी होगी। पिक-अप और ड्रॉप की व्यवस्था नियोक्ता की जिम्मेदारी होगी।
नए नियमों के तहत सप्ताह में अधिकतम कार्य अवधि 48 घंटे तय की गई है। इसके अलावा, दैनिक कार्य घंटों, विश्राम अवधि और कार्य समय के विस्तार (स्प्रेड ओवर) को लेकर अलग से अधिसूचना जारी की जाएगी। किसी भी श्रमिक से सप्ताह में 48 घंटे से अधिक कार्य नहीं कराया जा सकेगा।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, असंगठित क्षेत्र के 16 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी श्रमिकों के लिए आधार से जुड़ा पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। साथ ही गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के गठन का भी प्रावधान किया गया है, जिसमें संसद, राज्यों, श्रमिक संगठनों और नियोक्ताओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि श्रम संहिताओं के तहत ‘वेतन’की परिभाषा को व्यापक किया गया है। यदि भत्ते और अन्य भुगतान कुल पारिश्रमिक के 50 प्रतिशत से अधिक होते हैं, तो अतिरिक्त राशि को वेतन में जोड़ा जाएगा। हालांकि, प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन, ईएसओपी और प्रतिपूर्ति आधारित भुगतान को वेतन का हिस्सा नहीं माना जाएगा।नियमों में निश्चित अवधि (फिक्स्ड टर्म) के रोजगार को भी मान्यता दी गई है। ऐसे कर्मचारियों को एक वर्ष की निरंतर सेवा के बाद ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा, जबकि पहले यह सुविधा स्थायी कर्मचारियों को पांच वर्ष बाद मिलती थी। ग्रेच्युटी के ये प्रावधान 21 नवंबर 2025 से प्रभावी होंगे।

सरकार ने ठेकेदारों के लिए एकल इलेक्ट्रॉनिक लाइसेंस प्रणाली का भी प्रावधान किया है, जिससे एक से अधिक राज्यों या पूरे देश में कार्य करने वाले ठेकेदारों को 45 दिनों के भीतर लाइसेंस स्वीकृति या अस्वीकृति की जानकारी मिल सकेगी। सरकार ने चारों श्रम संहिताओं के मसौदा नियमों पर 30 से 45 दिनों के भीतर सार्वजनिक सुझाव आमंत्रित किए हैं। अंतिम नियमों के मार्च तक अधिसूचित होने की संभावना है, जिसके बाद 1 अप्रैल से नई श्रम संहिताएं लागू हो सकती हैं।

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