
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम में 3 वर्षों के बाद बजट चर्चा पर पार्षद और स्थायी समिति के सदस्य राजपाल सिंह ने अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करते हुए कहा कि दिल्ली नगर निगम दिल्ली की पहचान है। अब ‘दीवार गिराने से काम नहीं चलेगा अब तो नींव का हरेक पत्थर बदलना होगा, उन्होंने कहा कि जरूरत इस बात की है कि निगम के पैसे से भी ज्यादा जरूरत है। उसे एक मॉनिटरिंग की।निगम के अंदर लीकेज को समाप्त करना है, तो कुछ महत्वपूर्ण विषय पर ध्यान देना ही होगा। बजट पर चर्चा होनी चाहिए। बजट में जिस पर चर्चा होती है उस पर क्रियान्वयन का काम सही तरीके से भी होनी चाहिए, जो आमतौर पर नहीं होती है। राजपाल सिंह ने कहा कि जब हम सड़क, नाले,खड़ंजे कॉलोनियों में बनाते हैं तो हम गुणवत्ता के चलते ठेकेदारों के लिए एक प्रकार से दुश्मन सा हो जाते हैं। दिल्ली में आज कोई भी ऐसी सड़क नहीं है, जो तय की गई समय अवधि को पूरा करें, उन्होंने कहा कि दिल्ली नगर निगम आमतौर पर 10 वर्ष के लिए सड़कों का निर्माण करती है। किंतु खराब गुणवत्ता के चलते ढाई से 3 वर्षों में ही सड़क की हालत खासताहाल हो जाती है। जब सड़कें का निर्माण कार्य चल रहा होता है तो वहां विभाग के जेई कभी दिखते नहीं। बजट चर्चा पर उन्होंने कहा कि सड़कों के खराब गुणवत्ता के कारण निगम की किरकिरी होती है। और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि जिन सड़कों का टेंडर लगता है। ठेकेदार उसे चालीस से पचास प्रतिशत कम रेट पे उठा लेते है।
फिर इसकी भरपाई करने के लिए गुणवत्ता में वह कटौती करके अपना पल्ला झाड़ लेता है। इससे एक तो धन की बरवादी होती है। दूसरी ओर नगर निगम की किरकिरी, उन्होंने कहा कि निगम में पैसे की कोई कमी नहीं है, केवल उपयोगिता और प्रॉपर मॉनिटरिंग की जरूरत है जो आमतौर पर होती नहीं है।














