
जोधपुर : राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मुनुरी लक्ष्मण ने मोटर यान दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) जोधपुर प्रथम से दो सप्ताह में इस आक्षेप पर स्पष्टीकरण रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है कि एक्सिस बैंक ने बीमा कंपनी का खाता कुर्क कर 86 लाख 8 हजार 51 रुपये का ड्राफ्ट 28 फरवरी को अधिकरण के समक्ष जमा कराना चाहा, लेकिन अधिकरण ने बिना आदेश पारित किए ड्राफ्ट लेने से इनकार कर दिया।
याचिकाकर्ता अमित जालानी ने अपने अधिवक्ता अनिल भंडारी के माध्यम से रिट याचिका दायर कर कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने 8 नवंबर 2023 को उनकी पत्नी की सड़क दुर्घटना में हुई मृत्यु पर मुआवजा राशि बढ़ाई थी। बीमा कंपनी की ओर से निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करने पर उन्होंने 23 दिसंबर को अधिकरण के समक्ष इजराय प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। डेढ़ माह बाद 10 फरवरी को अधिकरण न्यायाधीश ने बैंक को निर्देश दिया कि बीमा कंपनी का खाता कुर्क कर 86 लाख 8 हजार 51 रुपये होल्ड कर 3 मार्च तक सूचित करें।
अधिवक्ता भंडारी ने कहा कि बैंक के सहायक प्रबंधक 28 फरवरी को बैंक का पत्र और कुर्क राशि का ड्राफ्ट जमा कराने अधिकरण पहुंचे, लेकिन न्यायाधीश ने बिना आदेशिका पारित किए ड्राफ्ट और पत्र लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद 3 मार्च को बैंक को दोबारा आदेश जारी किया गया कि उसने खाता कुर्क करने की सूचना नहीं दी है, और सुनवाई की तिथि पहले 28 मार्च और बाद में 17 अप्रैल कर दी गई।
भंडारी ने तर्क दिया कि दीवानी प्रक्रिया संहिता के आदेश 21, नियम 46 ए के तहत स्पष्ट प्रावधान है कि कुर्क की गई राशि तुरंत दावेदार को सौंपी जानी चाहिए ताकि उसे समय पर डिक्री का लाभ मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि मोटर वाहन अधिनियम कल्याणकारी होने के बावजूद, अधिकरण न्यायाधीश जानबूझकर आधे-अधूरे आदेश पारित कर दावेदारों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अधिकरण में चार-चार साल से इजराय प्रार्थना पत्र लंबित हैं, और अवॉर्ड राशि प्राप्त करने के लिए नाबालिग बच्चों को भी उपस्थित होने पर मजबूर किया जाता है, जबकि उनके हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय पूर्व में आदेश दे चुका है कि मोटर दावों में विशेष रूप से इजराय प्रार्थना पत्र पर 15 दिन से अधिक की तारीख नहीं दी जाए, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है और जानबूझकर अंतिम कार्य दिवस की तिथि दी जाती है।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि अधिकरण न्यायाधीश को बिना आदेशिका पारित किए कुर्क राशि का ड्राफ्ट लौटाने का कोई अधिकार नहीं था, बल्कि यह उनका कर्तव्य था कि अधिकरण में मौजूद दावेदार को ड्राफ्ट सौंपा जाए। राजस्थान उच्च न्यायालय ने प्रतिपक्ष को नोटिस जारी कर एमएसीटी जज को दो सप्ताह में स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है और मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल को निर्धारित की है।