
राजस्थान पुलिस ने दुबई से लॉरेंस बिश्नोई-रोहित गोदारा गैंग के सदस्य आदित्य जैन उर्फ टोनी को गिरफ्तार किया है। टोनी इस गैंग के लिए डब्बा कॉलिंग करता था, जिसमें वह व्यापारियों को धमकी देकर फिरौती की मांग करता था। वह गैंग के लिए एक डायरी की तरह था, जिसमें यह पूरा हिसाब रहता था कि किसे धमकाना है या किसे फायरिंग के लिए भेजना है।
गैंगस्टर टोनी का अपराध का इतिहास
टोनी, जो नागौर जिले का निवासी है, ने 2018 में जेल में लॉरेंस गैंग के सदस्य वीरेंद्र चारण से मुलाकात की थी, जिसके बाद वह गैंग में शामिल हो गया। उसके बाद से वह व्यापारियों को व्हाट्सएप कॉल और वॉयस रिकॉर्डिंग के जरिए धमकी देता था। टोनी के खिलाफ अपहरण, बलात्कार, जबरन वसूली, अवैध हथियार रखने जैसे गंभीर अपराधों के सात मुकदमे दर्ज हैं।
गैंग का तरीका और डब्बा कॉलिंग
गैंग के सदस्य अक्सर व्हाट्सएप या सिग्नल वीओआईपी कॉल्स के जरिए फिरौती की मांग करते थे। डब्बा कॉलिंग की तकनीक का उपयोग करके, दो फोन की मदद से धमकी दी जाती थी, जिससे किसी भी प्रकार की जांच में रुकावट आती थी। डब्बा कॉलिंग के जरिए गैंग अपनी पहचान छुपाकर अपराध करता था और इसके लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का इस्तेमाल किया जाता था।
गैंग की अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग
लॉरेंस बिश्नोई और रोहित गोदारा का यह गैंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करता है और इसके सदस्य विदेशों में छुपकर भी अपराध करते हैं। गैंग के सदस्य नए शार्प शूटरों को प्रशिक्षित करते हैं, फर्जी पहचान पत्र बनवाते हैं, और अपराध के पैसे को सफेद करने का काम भी करते हैं।
खुफिया एजेंसियों की चुनौती
गैंग के सदस्य जो विदेश में बैठकर अपराध कर रहे हैं, उनकी पहचान छुपाना और उन्हें पकड़ना खुफिया एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके बावजूद, एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स और पुलिस अब इस गिरोह के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है।
इस गिरफ्तारी ने इस अंतरराष्ट्रीय गैंग के खिलाफ एक बड़ी जीत हासिल की है, लेकिन पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लिए यह चुनौती जारी रहेगी, क्योंकि गैंग के सदस्य अब भी विदेश में सक्रिय हैं।