प्रयागराज माघ मेला : मौनी अमावस्या पर 3 से 4 करोड़ श्रद्धालुओं के पवित्र स्नान का अनुमान, प्रशासन ने लागू की नई भीड़ प्रबंधन व्यवस्था

प्रयागराज : त्रिवेणी के तट पर लगने वाले आस्था के महा समागम माघ मेले के सबसे बड़े स्नान पर्व मौनी अमावस्या के लिए माघ मेला प्रशासन ने कई नए कदम उठाए हैं। पिछले दो स्नान पर्वों में उमड़ी भीड़ को देखते हुए इस बार प्रशासन ने स्नान पर्व के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। स्नान घाटों का विस्तार, संगम नोज में भीड़ का प्रबंधन और हर आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए तैयारी पर अमल शुरू हो गया है।

3 से 4 करोड़ श्रद्धालुओं के मौनी अमावस्या स्नान पर्व का अनुमान

संगम किनारे 3 जनवरी 2026 से चल रहे माघ मेले का सबसे बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या है। ग्रह नक्षत्रम ज्योतिष शोध संस्थान के ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार, 17 जनवरी की रात 12 बजे अमावस्या लग जाएगी, लेकिन पुण्यकाल सुबह 5:20 बजे से शुरू होकर सूर्यास्त तक रहेगा।

स्वामी अभय चैतन्य ब्रह्मचारी के अनुसार, मौनी अमावस्या में मौन रहकर पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। मौन रहकर जप, तप और स्नान करने से सर्वसिद्धि की प्राप्ति होती है। इस पुण्य अवसर पर त्रिवेणी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

माघ मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि शनिवार सुबह से दोपहर तक 15 लाख से अधिक श्रद्धालु त्रिवेणी में स्नान कर चुके हैं। उनके अनुसार मौनी अमावस्या पर संगम और आसपास के घाटों में 3 से 4 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के स्नान का अनुमान है।

24 घाटों में स्नान, 1000 वर्ग फीट सर्कुलेटिंग एरिया, घाटों का विस्तार

माघ मेला प्रशासन की प्राथमिकता है कि सभी श्रद्धालु सुरक्षित रूप से पुण्य स्नान कर सकें। इसके लिए मेला क्षेत्र में घाटों का विस्तार किया गया है। कुल 24 घाटों का निर्माण किया गया है और श्रद्धालुओं को निकटतम घाटों में स्नान कराने की व्यवस्था की गई है।

भीड़ को व्यवस्थित रूप से सर्कुलेट कराने के लिए जोन व्यवस्था लागू की गई है। इस बार 1000 वर्ग फीट का सर्कुलेटिंग एरिया बनाया गया है। प्रत्येक सेक्टर से आने वाले श्रद्धालुओं को उसी सेक्टर में स्नान कराकर वापसी के मार्ग से भेजा जाएगा। 42 स्थानों पर बनी पार्किंग के आगे दो- या चार पहिया वाहन प्रवेश नहीं पाएंगे।

बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था और आपात स्थिति के लिए एम्बुलेंस कॉरिडोर

संगम नोज में भीड़ के दबाव को देखते हुए सेफ्टी का विशेष मॉडल लागू किया गया है। इसके तहत संगम नोज और ऐरावत घाट में 650 से अधिक सुरक्षा कर्मी तैनात रहेंगे।

घाटों में त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। 15,000 से अधिक पुलिस कर्मी, जल पुलिस का सुरक्षा घेरा, 1524 AI बेस्ड CCTV कैमरे और ड्रोन के माध्यम से भीड़ की सतत निगरानी की जाएगी।

आपात स्थिति के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है और विशेष स्थिति में पहली बार किले के गेट को खोला जाएगा। दो वॉटर एम्बुलेंस भी तैयार रहेंगी। पुलिस आयुक्त जोगिंदर कुमार ने बताया कि स्नान पर्व से पहले मॉक ड्रिल की जा चुकी है।

सुरक्षा कारणों से मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर नावों का संचालन नहीं होगा।

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