
- आस्था पर भारी पड़ रही प्रशासन की उदासी
- सड़क शौचालय सफाई व्यवस्था केवल मेला प्रशासन की फाइल में कैद
Prayagraj : आस्था का महापर्व प्रयागराज माघ मेला शुरू हुए लगभग एक सप्ताह होने वाला है किंतु व्यवस्था में इतनी कमियां हैं कि कल्पवासी और श्रद्धालु स्नान घाटों की तलाश में घाट घाट भटक रहे हैं और मेला प्रशासन की उदासीनता आस्था पर भारी पड़ रही है।
उल्लेखनीय है कि पुल नंबर दो और तीन सदैव से ही माघ मेले में अति महत्वपूर्ण रहे हैं किन्तु इस बार गंगा पार पूर्वी तट पर स्नान घाटों का निर्माण समाचार लिखे जाने तक नहीं किया गया है ऐसे में कल्पवासी संत महात्मा और श्रद्धालु गणों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। पुल नंबर दो त्रिवेणी मार्ग पर सभी सम्मानित शंकराचार्य एवं प्रमुख संतों को स्थान दिया गया है किंतु अभी तक वे वांछित सुविधाएं नहीं मिल पाने से असंतुष्ट लग रहे हैं।
संत महात्माओं के शिविर में रहने वाले कल्पवासियों और श्रद्धालु भक्तों को स्नान करने एक नंबर पुल पर अथवा चार नंबर पुल पर बहुत दूर जाना पड़ता है। पुल नंबर दो और तीन से गंगा के समीप संपर्क मार्ग भी आनन फानन में केवल खाना पूर्ति के लिए बना दिए गए हैं जिन पर कीचड़ और उखड़ी हुई चकर्ड प्लेटें यत्र तत्र दुर्घटना को दावत दे रही हैं।
आश्चर्यजनक तो यह है कि मेला प्रशासन द्वारा दो और तीन नंबर पुल पर पूर्वी भाग में स्नान घाटों को बनाने में कोई रुचि नहीं दिखाई पड़ती है। अतीत में इन दोनों पुलों पर घाटों की इतनी घोर उपेक्षा कभी नहीं देखी गई थी। आज इस पर बैरिकेडिंग भी कर दी गई है जिसके कारण कल्पवासी और श्रद्धालु निराशा जताते हुए दुखी हैं।
शौचालय सफाई और सड़क निर्माण में भी कोई प्रगति नहीं हुई है जबकि इन दोनों पुलों पर उपरोक्त सुविधाएं उपलब्ध कराने में विगत वर्षों में इस तरह उपेक्षा नहीं की गई थी। लोगों ने अविलंब माघ मेला प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए आशा व्यक्त की है कि कल्पवासियों और श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।












