Prayagraj : माघ मेले में प्रवाहित हो रही आस्था, भक्ति और संकल्प की अद्भुत त्रिवेणी, कल्पवासियों का संयम और संकल्प बने नज़ीर

  • 93 साल के शंभूनाथ माघ मेले में गंगा के तट पर कर रहे हैं 16 वां अखंड कल्पवास, पैर में फ्रैक्चर होने के बावजूद अडिग है कल्पवास का उनका संकल्प
  • 76 साल की शकुंतला 7 साल से लगातार कर रही है माघ मेला में कल्पवास, गंगा मैया के रेती पर एक महीने के कल्पवास का साल भर रहता है इंतजार

युवाओं में दिख रही है कल्पवास की धुन, यूपी में योगी आदित्यनाथ के सत्ता संभालने के बाद हो रहा है सनातन धर्म का विस्तार

Prayagraj : प्रयागराज के संगम तट में लगे आस्था के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक समागम माघ मेले में पौष पूर्णिमा स्नान पर्व के साथ ही कल्पवास की परंपरा की भी शुरुआत हो चुकी है। पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक एक महीने तक चलने वाले कल्पवास की परंपरा का निर्वहन करने के लिए मेला क्षेत्र में 4 लाख से अधिक कल्पवासी अपना संकल्प शुरू कर चुके हैं। मेला अधिकारी ऋषिराज बताते हैं कि इसके लिए प्रयागवाल नगर में अलग से 960 बीघा क्षेत्र में बसाया गया है, जिसका प्रबंधन तीर्थ पुरोहित कर रहे हैं।

संयम और साधना की पराकाष्ठा की मिसाल हैं बुजुर्ग कल्पवासी

कल्पवास एक कठिन साधना की परंपरा है, जिसमें घर की सभी सुख-सुविधाओं का परित्याग कर तंबुओं में एक महीने तक गंगा की रेती पर रहना होता है। आचार, विचार और आहार में सभी नियमों का पालन करना पड़ता है। कम ही लोग कल्पवास का संकल्प लेते हैं, क्योंकि एक बार संकल्प लेने के बाद इसे लगातार 12 वर्ष तक करना अनिवार्य होता है। लेकिन संकल्प के आगे कई बार ये नियम भी सहज लगते हैं।

प्रयागराज के फूलपुर के सराय डीह के रहने वाले शंभूनाथ पांडे माघ मेला क्षेत्र के प्रयागवाल नगर में 17वां अखंड कल्पवास कर रहे हैं। शंभूनाथ बताते हैं कि उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचने के बाद उनके पास कल्पवास की ऊर्जा कहां से आती है, उन्हें नहीं पता। पैरों में सपोर्ट न होने के कारण वह लकड़ी की स्टिक के सहारे चलते हैं और गंगा मैया का स्नान कर वापस अपने दुर्गा शक्ति शिविर में आकर पूरा कल्पवास करते हैं।

जौनपुर जिले के जंघई से आई 76 वर्षीय शकुंतला देवी अपने पति के साथ लगातार सातवां कल्पवास कर रही हैं। हड्डी कंपकपा देने वाली सर्दी के बावजूद वह सुबह ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करती हैं। तंबू में पुआल पर सोती हैं और अपना पूरा समय भगवत भक्ति और सत्संग में गुजारती हैं।

युवाओं में भी कल्पवास की धुन, महाकुंभ के आयोजन से हुई ब्रांडिंग

प्रौढ़ और बुजुर्गों के साथ ही युवा पीढ़ी भी कल्पवास के रंग में नजर आ रही है। दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी शंकराश्रम का कहना है कि वह पिछले 46 वर्षों से त्रिवेणी तट पर माघ महीने का कल्पवास कर रहे हैं।

महाकुंभ 2025 के आयोजन के बाद प्रौढ़ और बुजुर्गों की तुलना में 18 से 35 आयु वर्ग की नई पीढ़ी की मौजूदगी भी इस बार माघ मेला में कल्पवासियों के शिविर में देखने को मिल रही है। पहले नई पीढ़ी में धर्म और सनातन के प्रति जो उदासीनता या तटस्थता रहती थी, इस बार उसमें तेजी से बदलाव दिख रहा है।

नई पीढ़ी के युवा अपने बुजुर्गों के साथ कल्पवास कर रहे हैं, संगम में डुबकी भी लगा रहे हैं। उनके मस्तक पर सनातन के प्रतीक तिलक की उपस्थिति भी दिख रही है और सेवा का भाव भी नजर आ रहा है। यह सनातन की तरफ नई पीढ़ी की उत्सुकता और झुकाव का संकेत है।

यह बदलाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के महाकुंभ आयोजन और उसके प्रचार-प्रसार के संकल्प से जुड़ा लगता है, जिसके बाद इन युवाओं के लिए योगी जी युवा आइकॉन बन गए हैं।

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