
पुणे नगर निगम (PMC) चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, शहर के कुछ इलाकों में चुनाव प्रचार का स्वरूप बदलता साफ दिखाई दे रहा है। विमन नगर, लोहेगांव और वाघोली जैसे तेज़ी से विकसित हो रहे और पॉश क्षेत्रों में अब पारंपरिक नारे, बैनर और नुक्कड़ सभाओं की जगह प्रेज़ेंटेशन, संरचित संवाद और डेटा आधारित योजनाएं दिखाई दे रही हैं।
इस बदले हुए चुनावी अंदाज़ की अगुवाई भाजपा उम्मीदवार ऐश्वर्या पठारे और सुरेंद्र पठारे कर रहे हैं, जिन्होंने एक “कॉरपोरेट-स्टाइल मेनिफेस्टो” के ज़रिए चुनावी मैदान में नई पहल की है। यह प्रयास पुणे की शहरी राजनीति में पेशेवर, परिणाम-केंद्रित और योजनाबद्ध शासन की बढ़ती सोच को दर्शाता है।
यह मेनिफेस्टो पारंपरिक घोषणाओं से अलग है। इसे लिखित दस्तावेज़ों और PPT आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से पेश किया गया है, जिसमें समयबद्ध लक्ष्य, स्पष्ट कार्ययोजनाएं और मापने योग्य मानक तय किए गए हैं। इसका फोकस बड़े वादों के बजाय लोहेगांव, वाघोली और विमन नगर में लंबे समय से लंबित नागरिक समस्याओं के व्यावहारिक समाधान पर केंद्रित है।
प्रमुख मुद्दों में बुनियादी ढांचे की कमी, ट्रैफिक जाम, अनियोजित शहरी विस्तार और मूलभूत नागरिक सुविधाओं की असमान आपूर्ति शामिल है। प्रस्तावों में ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए सड़क चौड़ीकरण, सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी को मजबूत करना, अनधिकृत निर्माण पर नियंत्रण और सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देना शामिल है।
पठारे का यह चुनावी अभियान टीम देवेंद्र फडणवीस द्वारा आगे बढ़ाए जा रहे व्यापक राजनीतिक दृष्टिकोण से भी मेल खाता है, जिसमें शहरी क्षेत्रों में युवा, शिक्षित और पेशेवर पृष्ठभूमि वाले नेतृत्व को आगे लाने पर ज़ोर दिया जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उद्देश्य व्यक्तित्व आधारित राजनीति के बजाय प्रोफेशनल मैनेजमेंट मॉडल पर आधारित शासन व्यवस्था को बढ़ावा देना है।
पेशे से इंजीनियर और उद्यमी ऐश्वर्या पठारे ने नागरिकों से संवाद के दौरान कहा कि आधुनिक शासन को केवल भाषणों और नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार शहरी मतदाता अब योजनाओं के क्रियान्वयन, समयसीमा और जवाबदेही को लेकर स्पष्टता चाहते हैं।
इस अभियान की एक अहम विशेषता पारदर्शिता पर दिया गया ज़ोर है। उम्मीदवारों ने हर छह महीने में प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने की प्रतिबद्धता जताई है, जो आमतौर पर कॉरपोरेट प्रोजेक्ट रिव्यू में देखने को मिलती है। चुनावी बैठकों में डेटा आधारित प्रेज़ेंटेशन, प्रोजेक्ट टाइमलाइन और परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स के ज़रिए मतदाताओं को योजनाओं की कार्यप्रणाली समझाई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह तरीका पुणे जैसे शहरी केंद्रों में प्रभावी साबित हो रहा है, जहां बड़ी संख्या में आईटी प्रोफेशनल्स, उद्यमी और युवा कामकाजी मतदाता हैं। ऐसे मतदाता भावनात्मक अपील की बजाय दक्षता, योजना और ठोस नतीजों पर आधारित राजनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इंजीनियर और भाजपा उम्मीदवार सुरेंद्र पठारे ने भी जनसंवाद के दौरान कहा कि बदलती अपेक्षाओं के साथ राजनीति को भी स्वयं को ढालना होगा और फोकस घोषणाओं से अधिक डिलीवरी पर होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी इस नए प्रचार मॉडल को लेकर चर्चा तेज़ है। “कॉरपोरेट-स्टाइल मेनिफेस्टो” को भाजपा की नई पीढ़ी की राजनीति और परफॉर्मेंस-ड्रिवन गवर्नेंस की दिशा में एक अहम संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
PMC चुनावों की पृष्ठभूमि में यह बदला हुआ प्रचार अंदाज़ इस ओर इशारा करता है कि पुणे की नागरिक राजनीति अब ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां डेटा, योजना और पेशेवर क्रियान्वयन चुनावी विमर्श का केंद्रीय हिस्सा बनते जा रहे हैं।















