
Nainital : उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड की ओर से गठित कमेटी के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका को सुनवाई के बाद निस्तारित कर दिया है।
बोर्ड ने साहसिक पर्यटन के लिए राफ्ट की संख्या तय की थी। बोर्ड की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड ने गंगा नदी की वहन क्षमता का अनुमान लगाने के लिए 15 सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी और यह निर्णय लिया गया था कि गंगा नदी की अधिकतम वहन क्षमता 576 राफ्ट होगी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सक्षम अथॉरिटी को प्रत्यावेदन देने व अथॉरिटी उस हिस्से की तकनीकी जांच कर छह माह में निर्णय लेने के निर्देश दिए।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार अलकनंदा गंगा रीवर राफ्टिंग समिति ने हाईकोर्ट मं याचिका दायर कर पर्यटन विकास बोर्ड की ओर से गठित कमेटी के निर्णय को चुनौती दी गई। याचिकाकर्ता का कहना था कि कमेटी का आकलन गलत है, क्योंकि एक राफ्ट को रैपिड पार करने में एक मिनट का समय लगता है, जबकि कमेटी ने उस समय को लगभग तीन मिनट माना है। कोर्ट ने कहा कि यह विशेषज्ञ का काम है कि एक तय समय में कितनी राफ्ट चलाई जा सकती हैं। कमेटी ने अपने मिनट्स में देखा है कि देवप्रयाग से कोडियाला के बीच 36 किमी के हिस्से को राफ्टिंग के लिए खोलने पर विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने याचिका काे निस्तारित करते हुए याचिकाकर्ता को सक्षम अथॉरिटी को प्रत्यावेदन देने व अथॉरिटी उस हिस्से की तकनीकी जांच कर छह माह में निर्णय लेने के निर्देश दिए।















