
चिंतन हरिया, प्रिंसिपल इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी
सेक्टर और थीमैटिक निवेश एक बार फिर निवेशकों के फोकस में हैं। बैंकिंग, आईटी, हेल्थकेयर, एफएमसीजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी और ईवी जैसे नए विषयों पर लगातार नज़र रखी जा रही है। वजह साफ है। सेक्टर की चालें अक्सर बड़ी होती हैं और थीम्स तेजी से उभरती हैं। लेकिन सेक्टर रिटर्न और व्यापक आर्थिक माहौल के बीच का रिश्ता जटिल होता है और इसे समझना व नियमित रूप से ट्रैक करना आसान नहीं होता।
अगर अलग अलग कैलेंडर वर्षों में सेक्टर रिटर्न पर नज़र डालें, तो साफ दिखता है कि नेतृत्व बार बार बदलता रहता है। जो सेक्टर एक साल मजबूत दिखता है, वही अगले साल कमजोर पड़ सकता है। यही कारण है कि अधिकतर निवेशकों के लिए निरंतरता बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।
थीमैटिक निवेश में भी स्पष्टता बेहद जरूरी है। कोई भी थीम अक्सर एक से ज्यादा सेक्टरों में फैली होती है और समान अवसर या विचार से जुड़े उद्योगों और शेयरों को जोड़ती है। यही वजह है कि थीम्स आकर्षक लगती हैं, लेकिन बिना किसी स्पष्ट ढांचे के जोखिम भी बढ़ा देती हैं।
एक और अहम बदलाव निवेशकों के व्यवहार से जुड़ा है। बाजार के अत्यधिक उतार चढ़ाव भावनाओं को बढ़ा देते हैं। डर और लालच अक्सर देर से निवेश और जल्दी निकलने के फैसलों की वजह बनते हैं। ऐसे में निवेशक ऐसे फ्रेमवर्क की तलाश करते हैं, जो निर्णय प्रक्रिया को संतुलित और स्थिर रख सके।
सेक्टर और थीमैटिक निवेश तक पहुंच पैसिव रूट के जरिये भी बनाई जा सकती है। यहीं मल्टी सेक्टर पैसिव फंड ऑफ फंड्स का तरीका प्रासंगिक हो जाता है। इसमें निवेश के आधार पैसिव रहते हैं, सेक्टर और थीम एलोकेशन की सुविधा बनी रहती है और निवेशक को बार बार सक्रिय फैसले लेने की जरूरत नहीं पड़ती।
सेक्टर टाइमिंग जितनी आसान दिखती है, उतनी होती नहीं
पीछे मुड़कर देखने पर सेक्टर का प्रदर्शन अक्सर स्पष्ट नजर आता है, लेकिन वास्तविक समय में ऐसा कम ही होता है। व्यापक आर्थिक परिस्थितियां लगातार बदलती रहती हैं और अलग अलग सेक्टर अलग संकेतों पर प्रतिक्रिया देते हैं। नतीजतन सेक्टरों के बीच रोटेशन बना रहता है।
डॉटकॉम दौर इसका एक स्पष्ट उदाहरण है। निफ्टी आईटी इंडेक्स ने दो हजार की शुरुआत तक तेज उछाल देखा। फरवरी उन्नीस सौ निन्यानवे से फरवरी दो हजार के बीच इसमें सात सौ बारह प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। लेकिन इसके बाद तेज गिरावट आई। बारह अप्रैल दो हजार से बारह अप्रैल दो हजार एक के बीच इंडेक्स ने माइनस इक्यासी दशमलव छिहत्तर प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक गिरावट दर्ज की। ऐसे चक्र निवेशकों के धैर्य और टाइमिंग दोनों की कड़ी परीक्षा लेते हैं।
हेल्थकेयर सेक्टर भी यही कहानी बताता है। निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स ने एक अप्रैल दो हजार पंद्रह से एक अप्रैल दो हजार अठारह के बीच माइनस दस दशमलव पचहत्तर प्रतिशत का चक्रवृद्धि वार्षिक रिटर्न दिया। इसके बावजूद इससे पहले फार्मा सेक्टर में निवेश तेजी से बढ़ा था। अप्रैल दो हजार चौदह से अप्रैल दो हजार पंद्रह के बीच इस सेक्टर में निवेश सत्तावन प्रतिशत तक बढ़ गया। इससे यह समझ आता है कि कई बार सेक्टर निवेशकों का ध्यान और पूंजी आकर्षित करते हैं, फिर भी लंबे समय तक रिटर्न सीमित रह सकते हैं।
यहां मुख्य संदेश अनुशासन का है। सेक्टर चयन तभी प्रभावी होता है जब उसकी निरंतर निगरानी की जाए।
अधिकतर निवेशक इसी अनुशासन को नजरअंदाज कर देते हैं। अनुशासन का मतलब किसी सेक्टर पर राय बनाना नहीं, बल्कि पहले से तय नियम होना है। कितना निवेश करना है, कितने समय तक निवेश बनाए रखना है और किन संकेतों पर दृष्टिकोण बदलना है। इस तरह की स्पष्टता के बिना सेक्टर निवेश अक्सर प्रतिक्रियात्मक फैसलों में बदल जाता है।
किसी एक सेक्टर में निवेश की सीमा तय करना और आपस में जुड़े थीम्स पर अलग से नियंत्रण रखना, एक ही व्यापक आर्थिक झटके के बार बार असर को कम करता है। सेक्टर लंबे समय तक अस्थिर रह सकते हैं और अगर होल्डिंग अवधि स्पष्ट न हो, तो फैसले बुनियादी कारकों के बजाय तात्कालिक खबरों पर आधारित हो जाते हैं।
एक्सपोजर में बदलाव से पहले एक सुसंगत चेकलिस्ट भी मददगार होती है। इसमें उस व्यापक आर्थिक स्थिति का आकलन शामिल होता है जिस पर सेक्टर निर्भर करता है, कमाई के वे कारक जो निवेश को समर्थन देते हैं और वे संकेत जो यह दिखाएं कि निवेश का आधार कमजोर पड़ रहा है।
क्रियान्वयन में भी अनुशासन जरूरी है। एक साथ बड़ा बदलाव करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से बदलाव करना, बाजार की तात्कालिक चालों के प्रभाव को कम करता है और भावनात्मक निर्णयों से बचाता है।
अंत में विविधीकरण का सम्मान करना जरूरी है। कई थीम्स अलग अलग सेक्टरों में एक दूसरे से जुड़ी होती हैं। अगर दो थीम्स का मूल आधार एक जैसा है, तो अनजाने में एकाग्रता बढ़ सकती है। सेक्टर निवेश सबसे बेहतर तब काम करता है जब फैसले उत्साह से नहीं, बल्कि नियमों से संचालित हों।
यहीं पैसिव साधनों की उपयोगिता सामने आती है। ईटीएफ सेक्टर और थीम्स में पारदर्शी और नियम आधारित निवेश का अवसर देते हैं। ये तय इंडेक्स को ट्रैक करते हैं और एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं, चाहे वह सेक्टोरल हों, थीमैटिक हों या व्यापक बाजार से जुड़े हों।
निवेशकों को निवेश में बनाए रखने वाला फ्रेमवर्क
सेक्टर और थीमैटिक निवेश को अपनाने का व्यावहारिक तरीका एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया पर आधारित होता है। सबसे पहले सही चयन किया जाता है कि किन सेक्टर या थीम ईटीएफ का उपयोग किया जाए। इसके बाद माहौल बदलने पर एक्सपोजर को कैसे बदला जाए, यह तय होता है। फिर अलग अलग बास्केट्स में वेट तय किए जाते हैं, न कि केवल एक थीम पर निर्भर रहा जाता है। सही समय भी अहम होता है, क्योंकि सेक्टर चक्र तेज हो सकते हैं।
कर व्यवस्था भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पोर्टफोलियो के भीतर किए गए आंतरिक बदलावों पर टैक्स नहीं लगता, जबकि अलग अलग ईटीएफ को सीधे रखने पर कर देनदारी बन सकती है।
यहीं मल्टी सेक्टर पैसिव फंड ऑफ फंड्स की संरचना उपयोगी साबित होती है। इसमें कई सेक्टर और थीमैटिक ईटीएफ को एक साथ शामिल किया जा सकता है। समय के साथ लॉन्च होने वाले घरेलू इक्विटी ईटीएफ भी इसमें जोड़े जा सकते हैं। निवेश की शैली यह होती है कि व्यापक आर्थिक संकेतों पर नजर रखी जाए, थीम्स और सेक्टरों की पहचान की जाए, पैसिव विकल्पों में से ईटीएफ चुने जाएं और उनके वेट तय किए जाएं। निगरानी समय समय पर होती है और पैसिव आधार के भीतर एलोकेशन सक्रिय रहती है।
यह तरीका बदलती परिस्थितियों के अनुसार प्रतिक्रिया देने वाली प्रक्रिया पर आधारित होता है। मजबूत प्रदर्शन के बाद मुनाफावसूली करना और कमजोर प्रदर्शन के बाद वैल्यूएशन में सहजता तलाशना, इसी का हिस्सा है।
निवेशकों के लिए निष्कर्ष साफ है। जब सेक्टर या थीमैटिक निवेश एक सुसंगत और अनुशासित प्रक्रिया के तहत किया जाता है, तो परिणाम बेहतर होते हैं। पैसिव ईटीएफ निवेश का बास्केट उपलब्ध कराते हैं और मल्टी सेक्टर फंड ऑफ फंड्स आवश्यक ढांचा देता है। इससे बदलते व्यापक आर्थिक माहौल के साथ तालमेल बनाए रखना अधिक शांत, संतुलित और व्यवस्थित हो जाता है।















