
उमरिया जिला कारागार के समीप स्थित जंगल क्षेत्र के डिपो कस्टागार एरिया में सोमवार को अचानक उठी आग की भीषण लपटों ने पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मचा दी। करीब 50 एकड़ में फैले इस आगजनी कांड ने न केवल वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचाया, बल्कि स्थानीय लोगों में भय और प्रशासन पर अविश्वास का माहौल भी पैदा कर दिया है।
चिंगारियों ने बदला विकराल रूप, अब तक नहीं पता चला कारण
घटना की शुरुआत कैसे और कब हुई, इसका कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है। लेकिन यह बात सामने आ रही है कि झाड़ियों और सूखे पत्तों में अचानक उठी आग ने इतनी तेजी से फैलाव पकड़ा कि राहगीर स्तब्ध रह गए। यदि समय रहते एक राहगीर की नजर उस पर न पड़ी होती, तो यह आग पास के रिहायशी इलाकों तक पहुंच सकती थी।
कागज़ों तक सीमित रही पेट्रोलिंग, दीवारों पर ‘जागते रहो’, पर ज़मीनी हकीकत कुछ और
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस क्षेत्र में नियमित रूप से पेट्रोलिंग की बात कही जाती रही है, लेकिन वह केवल कागजों पर ही सीमित थी। जंगल की सुरक्षा के लिए लगाए गए ‘जागते रहो’ जैसे स्लोगन सिर्फ दीवारों की शोभा बढ़ा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई सक्रियता नहीं दिखी।
वन्य जीवन और पर्यावरण को भारी क्षति
तेज लपटों और धुएं के कारण जंगल में रहने वाले पशु-पक्षी और वनस्पतियों को भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि आग बारूद की तरह जल रही थी, जिससे क्षेत्र में रहने वाले वन्य जीवों और नजदीकी मानव बस्तियों को भी खतरा हो गया था।
सूचना मिलने के बाद भी वन विभाग की कार्रवाई में देरी
इस घटना के बाद वन विभाग की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि 400 से अधिक वन कर्मचारी नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात हैं, फिर भी आग पर काबू पाने के प्रयासों में देरी और लापरवाही साफ झलक रही थी। मौके पर पहुंची टीम ने प्रयास तो किए, लेकिन वे नाकाफी साबित हुए।
प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों और राहगीरों ने प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह घटना प्रशासन की निष्क्रियता और जंगल की सुरक्षा व्यवस्था में गहराई से मौजूद खामियों को उजागर करती है। यदि समय रहते निगरानी की जाती, तो यह घटना रोकी जा सकती थी।
जनता की मांग: जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने उच्च अधिकारियों से इस मामले में जांच और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही जंगल क्षेत्र में प्रभावी निगरानी और आग से निपटने के लिए संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया है।










