ऑपरेशन कन्विक्शन- सजा दिलाने में झांसी दूसरे नंबर पर

  • ढाई साल में 1587 अभियुक्तों को दिलाई सजा

झांसी। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत यूपी में अपराधियों को सजा दिलाने में बुलंदशहर प्रथम और झांसी दूसरे नंबर पर रहा है। यह शीर्ष जिलों में से एक है, अक्सर दूसरे या पहले नंबर पर आता है। खासकर गंभीर अपराधों (जैसे पॉक्सो, हत्या) में, जहां पुलिस समय पर जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए तेजी से सजा दिलाने में सफल रही है, जिससे अपराधियों में खौफ है और योगी सरकार की कानून व्यवस्था मजबूत हुई है।

शासन ने ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रदेश के जिलेबार अपराधियों को सजा दिलाने वाले जिले की रैकिंग जारी की है। इनमें बुलंदशहर प्रथम, झांसी दूसरा, बाराबंकी तीसरे, मुरादाबाद चौथे, अलीगढ़ पांचवें, सहारनपुर छठवें, कमिश्नरी आगरा सातवें, बिजनौर आठवें, अम्बेडरकर नगर नौवें, मुजफ्फरनगर दसवें, हापुड़ ग्यारह, एटा बारहवें, संभल तेरहवें, मथुरा पंद्रहवे नंबर पर है।

2025 में 560 लोगों को हुई सजा

झांसी में वर्ष 2025 में 560 आरोपियों को सजा हुई है जबकि 51 आरोपी दोषमुक्त हुए है। इनमें 23 आरोपियों को आजीवन कारावास, 18 आरोपियों को बीस साल का कारावास, 50 आरोपियों को दस से 14 वर्ष का कारावास, 30 आरोपियों को पांच से नौ वर्ष का कारावास, 115 आरोपियों को एक माह से पांच साल तक का कारावास और 324 आरोपियों को जेल में बिताई गई अवधि की सजा सुनाई गई है। बताते हैं कि जिन आरोपियों को सजा मिली है, उनमें पांच चिन्हित माफिया, पॉक्सो एक्ट में 23 आरोपी, बलात्कार में एक आरोपी, 302/दहेज हत्या में 24 आरोपी, लूट/डकैती में 33 आरोपी, गोवंध अधिनियम में एक आरोपी, चोरी/ग्रहभेदन में 51 आरोपी, नारकोटिक्स एक्ट में 18 आरोपी शामिल है।

माहवार का कारावास
जनवरी में 36, फरवरी में 52, मार्च में 48, अप्रैल में 33, मई में 26, जून में 16, जुलाई में 28, अगस्त में 55, सितंबर में 59, अक्तूबर में 49, नवंबर में 55 और दिसंबर माह में 103 आरोपियों को सजा सुनाई गई है।

एक जुलाई 2023 से अब तक
130 अभियुक्तों को आजीवन कारावास
44 अभियुक्तों को बीस साल की सजा
152 अभियुक्तों को दस से चौदह साल की सजा
1340 अभियुक्तों को पाँच से नौ साल की सजा
420 अभियुक्तों को एक माह से पाँच साल की सजा
760 अभियुक्तों को जेल में बिताई गई अवधि की सजा

सजा दिलाने में किस थाने को मिली कौन-सी रैंक
सबसे टॉप पर नवाबाद थाना रहा। दूसरे नंबर पर सीपरी बाजार, तीसरे नंबर पर कोतवाली, चौथे नंबर पर प्रेमनगर, पांचवें नंबर पर बबीना और छठवें नंबर पर सकरार रहा है। जबकि महिला थाना ने किसी भी मामले में सजा नहीं दिलाई है। यह थाना फिसड्डी साबित हुआ है। इसके अलावा देहात सर्किल के चार थाने भी कमजोर रहे है।

उल्लेखनीय है
सजा होने के फलस्वरूप अभियुक्त चुनाव नहीं लड़ सकते, सरकारी नौकरी नहीं पा सकते, शस्त्र लाइसेंस और पासपोर्ट नहीं बनवा सकते तथा ठेकेदारी लाइसेंस भी नहीं मिल सकता।

यह टीम करती है पैरवी

एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति के निर्देश पर मॉनिटरिंग सेल में एसपी (ग्रामीण) डॉ. अरविंद कुमार को नोडल अधिकारी बनाया गया है। सेल के प्रभारी चंद्रशेखर दुबे हैं। इनके साथ उपनिरीक्षक सर्वेंद्र कुमार सिंह, मुख्य आरक्षी सलमान पठान, पर्वत सिंह, दीपिका उपाध्याय और कुसुम पटेल शामिल हैं।

इनका कहना है

बीबीजीटीएस मूर्ति, एसएसपी झांसी – ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के अंतर्गत जैसे ही भारतीय न्याय संहिता के साथ-साथ पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लागू हुई है। उसे पुलिस की कार्यप्रणाली में भी तेजी आई है। न्यायालय में भी बेहतर पैरवी हो रही है। जिसके चलते हम प्रत्येक साल दोषियों को सजा दिलाने में सफल रहे हैं।

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