ऑनलाइन गेमिंग बैन से रोजगार पर संकट के बादल छाए, लाखों कर्मचारी बेरोजगार…ये रिपोर्ट उड़ा देगी आपके होश

नई दिल्ली । केंद्र सरकार के हालिया फैसले में रियल मनी ऑनलाइन गेमिंग पर लगाए गए प्रतिबंध का सबसे बड़ा असर उन लाखों कर्मचारियों पर पड़ा है जो इस सेक्टर से जुड़े थे। अचानक लागू हुए इस बैन के कारण ड्रीम-11, एमपीएल, ज़ूपी, पेटीएम फर्स्ट गेम्स, गेम्स24इन-टू7, जंगली गेम्स और अड्डा-52 जैसी प्रमुख कंपनियों को अपने ऑपरेशंस बंद करने पड़े। इस कारण हजारों प्रोफेशनल्स की नौकरी चली गई और पूरे सेक्टर का भविष्य अधर में लटक गया।

दिल्ली-एनसीआर स्थित दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अचानक यह ऐलान सुनना पड़ा कि अब कंपनी के लिए कोई काम नहीं बचा है और नए अवसर तलाशने होंगे। नौकरी गंवाने वाले कर्मचारियों में गेम डेवलपमेंट, प्लेटफ़ॉर्म मैनेजमेंट, कस्टमर सपोर्ट, मार्केटिंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हैं। इनमें से कई लोगों के पास घर और कार के लोन हैं, बच्चों की फीस और बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी है। ऐसे में नौकरी का जाना उनके लिए दोहरी चुनौती लेकर आया है।

इंडस्ट्री एसोसिएशन का अनुमान है कि इस प्रतिबंध से पहले भारत का रियल-मनी गेमिंग सेक्टर 30,000 करोड़ रुपये का था और इसमें दो लाख से अधिक लोगों को सीधा रोजगार मिला हुआ था। यदि आउटसोर्स कर्मचारियों को भी शामिल किया जाए तो यह संख्या तीन लाख तक पहुंचती है। यही नहीं, इस सेक्टर से विज्ञापन, कंटेंट क्रिएशन और टैक्स रेवेन्यू के जरिए सरकार को भी हजारों करोड़ रुपये की आय हो रही थी। अब यह सब अचानक रुक गया है।

सरकार का कहना है कि यह कदम सामाजिक हित में उठाया गया है क्योंकि ऑनलाइन मनी गेम्स ने परिवारों को बर्बाद किया, युवाओं को लत लगाई और कई बार आर्थिक तंगी के चलते आत्महत्या जैसी घटनाएं हुईं। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देशभर में करीब 45 करोड़ लोग इससे नकारात्मक रूप से प्रभावित हुए और उन्हें 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।

हालांकि, उद्योग जगत का कहना है कि बिना किसी ठोस विकल्प या ट्रांजिशन प्लान के लगाए गए इस प्रतिबंध ने वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। कर्मचारियों को डर है कि बेरोजगारी का यह संकट लंबे समय तक उनके करियर पर असर डालेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस सेक्टर के लिए स्पष्ट नीतियां और नियमन बनाती तो न केवल उपभोक्ताओं की सुरक्षा होती बल्कि लाखों रोजगार भी सुरक्षित रहते।

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