Noida : जल्लाद डेयरी मालिक ने यमुना में फेंका बच्चा! एक बाजू कटा था, भैंस वाला इंजेक्‍शन भी लगाया

Greater Noida : राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें डेयरी मालिक ने 15 वर्षीय नाबालिग लड़के की कटी हुई बाजू यमुना नदी में फेंक दी और उसे गंभीर रूप से घायल हालत में सड़क किनारे छोड़ कर फरार हो गया। इस सनसनीखेज घटना की जांच में पुलिस ने बताया कि आरोपी ने बच्चे को पशुओं को दिए जाने वाले टिटनेस इंजेक्शन का भी प्रयोग किया था। लंबे समय तक फरार रहने के बाद, छह महीने की कड़ी तलाश के बाद आरोपी डेयरी मालिक को गिरफ्तार किया गया है।

यह घटना जुलाई के अंतिम सप्ताह की है, जब बिहार के किशनगंज जिले का रहने वाला 15 वर्षीय लड़का ग्रेटर नोएडा के मोटीपुर मडैया गांव में अनिल की डेयरी पर जबरन मजदूरी करा रहा था। इसी दौरान, चारा काटने की मशीन में बच्चे का बायां हाथ फंस गया, जिससे हाथ पूरी तरह से कट गया। हादसे के बाद, आरोपी ने न तो बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुंचाया और न ही परिजनों को सूचित किया। बल्कि, सबूत मिटाने के मकसद से उसने बच्चे की कटी हुई बाजू यमुना नदी में फेंक दी।

बेहोशी की हालत में मिला बाजू कटा बच्चा

हड़बड़ी में, आरोपी ने घायल बच्चे को पशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले टिटनेस इंजेक्शन का भी प्रयोग किया। इसके बाद, वह हरियाणा के पलवल जिले के बड़ौली गांव के पास सड़क किनारे छोड़ कर फरार हो गया। बच्चे खून से लथपथ और अर्धबेहोशी की हालत में गश्त कर रही पुलिस टीम ने उसे सड़क किनारे पाया और पहले पलवल सिविल अस्पताल में भर्ती कराया। बाद में, उसे नूंह के सरकारी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन बच्चा मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत अस्थिर था, जिसकी वजह से वह अस्पताल से भाग गया।

बच्चे का लंबा सफर और खोजबीन

चार दिन बाद, 29 जुलाई को, नूंह-तावड़ू रोड पर बारिश में नंगे पांव चलते हुए दो सरकारी टीचरों ने बच्चे को देखा और पुलिस को सूचित किया। बच्चे तकरीबन 150 किलोमीटर पैदल चल चुका था, क्योंकि वह अपने घर बिहार लौटना चाहता था। बच्चे का बयां अस्पष्ट था, जिससे पुलिस को घटना के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई।

पुलिस ने हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में यमुना किनारे के लगभग 550 गांवों में डिटेल्स खंगाली। अधिकारियों ने तीन राज्यों के शिक्षा विभागों को पत्र लिखे, स्वास्थ्य विभाग से रिकॉर्ड खंगाले और यमुना किनारे के ग्राम प्रधानों से संपर्क किया। अंततः, दिसंबर के आखिर में, पुलिस आरोपी अनिल तक पहुंचने में सफल हुई।

पता चला कि मई 2024 में, जब लड़का अपने पिता के साथ यात्रा कर रहा था, तब झज्जर के बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर उसकी ट्रेन छूट गई। इसी दौरान, आरोपी अनिल ने उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ग्रेटर नोएडा ले गया और डेयरी पर बिना मजदूरी के काम करने को मजबूर किया। बच्चे को परिवार से संपर्क करने का कोई मौका नहीं दिया गया।

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