
Indore : मध्य प्रदेश के इंदौर में कथित रूप से दूषित पानी की आपूर्ति के चलते हुई 15 मौतों ने देश की सियासत को गरमा दिया है। इस मामले पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और प्रशासन की “लापरवाही” पर कड़ा सवाल खड़ा किया। राहुल गांधी ने कहा कि इंदौर में “पानी नहीं, जहर बांटा गया” और प्रशासन “कुंभकर्णी नींद” में रहा।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा
घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं और ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी, लेकिन सरकार ने घमंड परोस दिया। लोगों ने बार-बार गंदे और बदबूदार पानी की शिकायत की, फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई?
“सीवर पानी में कैसे मिला? जवाबदेही तय होनी चाहिए” राहुल गांधी
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा
- सीवर पीने के पानी में कैसे मिला?
- सही समय पर पानी सप्लाई क्यों नहीं रोकी गई?
- जिम्मेदार अधिकारियों और नेताओं पर कब कार्रवाई होगी?
उन्होंने कहा कि साफ पानी “कोई एहसान नहीं बल्कि नागरिकों का अधिकार” है, और इस अधिकार की हत्या के लिए “भाजपा की सरकार, उसका प्रशासन और नेतृत्व” जिम्मेदार है। राहुल गांधी ने इंदौर की घटना को “कुप्रशासन का उदाहरण” बताते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में लगातार गंभीर लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं।
खरगे का वार “डबल इंजन सरकार के बड़े दावे धराशायी”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा
जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत का ढोल पीटने वाली मोदी सरकार इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों पर मौन है। इंदौर साफ शहर का खिताब रखता है, लेकिन भाजपा की नाकामी के कारण लोग साफ पानी तक से वंचित हैं।
खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार की योजनाओं में भ्रष्टाचार व लापरवाही हावी है, और “डबल इंजन” का दावा केवल दिखावा साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि जनता साफ पानी और सुरक्षित जीवन चाहती है, न कि “खाली भाषण”।
जनता में आक्रोश, जवाबदेही की मांग तेज
इंदौर की इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और विपक्ष दलों में भारी नाराजगी है। साफ पानी की व्यवस्था, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस नीति की मांग लगातार उठ रही है। मामले को लेकर राजनीतिक हमले तेज हैं, जबकि लोगों की निगाहें सरकार की ठोस कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।















