
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम शाहदरा उत्तरी जोन के 2 सफाई निरीक्षक और एक वार्ड इंचार्ज ने अपने वेतन के एरियर के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटना उचित समझा, किन्तु एक जरा सी चूक के कारण उन्हें भारी पड़ गई। बता दें कि विगत दिनों एरियर के एवज में कोर्ट में दो-दो बार केस के चक्कर में तीनों ही कर्मचारियों ने कच्चे लालच में आकर अपनी नौकरी भी गवानी पड़ गई, इस मामले की जानकारी मिलते ही जोन उपायुक्त कर्नल अभिषेक मिश्रा ने तत्काल तीनों कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है, साथ ही अदालत ने भी कर्मचारियों पर जुर्माना भी लगा दिया।
बता दें कि पिछले दिनों लेबर कोर्ट ने नगर निगम शाहदरा साउथ जोन में तैनात एक सफाई कर्मचारी जोगिंदर पर 15 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया था, क्योंकि कर्मचारी जोगिंदर पर एक ही भुगतान के लिए दो-दो बार दावा कर अदालत को गुमराह करने का आरोप सिद्ध हुआ है जोगिंदर ने वर्ष 2019 में जोगिंदर बना ईस्ट नगर निगम शीर्षक से एलसीए 497/19 मामला तैयार किया गया था। इसके तहत उन्हें 5.50 में एलसीए 1951/23 के अंतर्गत एक और दवा दायर किया गया था, जोकि शपथ पत्र में झूठा बयान दिया गया था कि उन्हें अब तक कोई भुगतान नहीं प्राप्त हुआ है।
नगर निगम प्रबंधन ने लेबर कोर्ट को सूचित किया कि यह दावा पहले भी निपटारा किया जा चुका है। संबंधित कैलकुलेशन सीट में भुगतान प्रमाण प्रस्तुत किए गए हैं। अदालत में पाया गया कि कार्यकर्ता ने जानबूझकर तत्वों को छुपाया कर अदालत को गुमराह किया था, जिससे न्यायिक का समय खराब हुआ था। श्रम विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया था कि इस प्रकार की हरकतें जालसाजी व धोखाधड़ी की श्रेणी में आती है, जो अत्यंत अनुचित है। यह कृत्य न केवल न्यायपालिका को गुमराह करता है, बल्कि निगम को आर्थिक नुकसान भी पहुंचना है। ऐसे भ्रष्टाचारी को कानूनी दंडित करना चाहिए,