नई दिल्ली : निगम आयुक्त और जोन उपायुक्त हुए सख्त, लेकिन अधिकारी और कर्मचारी हुए मस्त

नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम आयुक्त अश्विनी कुमार के तमाम सख्ती के बावजूद भी निगम अधिकारियों और कर्मचारियों के दिलों-दिमागों से डर का खौफ बिल्कुल खत्म होता दिखाई दे रहा है। आए दिन अधिकारी-कर्मचारी कानूनों की अवहेलना करते हुए अपना फायदे कर पूरी तरह से तानाशाही करने में लगे हुए हैं।

अधिकतर अधिकारी और कर्मचारी अपने अधीनस्थ क्षेत्रों में मनमानी तरीके काम कर रहे हैं, जिसके चलते लाख कोशिशों के बावजूद भी समस्यायें सुधरने के बजाए और विकट होती जा रही है। निगम आयुक्त और जोन उपायुक्त के आदेशों की अवहेलना करते हुए सामान्य शाखा विभाग के लाइसेंस इंस्पेक्टर क्षेत्र में चलने वाली फैक्ट्रियों की ऊपर लगी सील को तुड़वाकर एक बड़ा भ्रष्टाचार खेल खेलने में लगे हुए है। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि पूर्वी दिल्ली के आजाद नगर वार्ड में स्थित संपत्ति संख्या 32वी हाजी कॉम्प्लेक्स कांति नगर और संपत्ति संख्या 17वी में ईस्ट आजाद नगर इलाके में फैक्ट्रियों की सील को तोड़ कर आवाजाही शुरू होने की संभावना जताई गई है। आपको बता दे कि सरकार द्वारा फैक्ट्रियों को बवाना औद्योगिक क्षेत्र में चलाने के लिए अनुमति दी गई थी, इसकी आवाज में फैक्ट्री मालिकों ने एक शपथ पत्र भी सरकार को सौंपा था, जिसमें साफ तौर पर दर्शाया गया था कि रिहायशी इलाकों में चलने वाली फैक्ट्रियों को तत्काल बंद कर भविष्य में कोई कमर्शियल एक्टिविटी नहीं करेंगे, लेकिन हाजी कॉम्प्लेक्स में सील तोड़कर चलने वाली फैक्ट्री मालिकों ने विभाग अधिकारियों से तालमेल कर फैक्ट्रियों को चलाने के लिए लाइसेंस भी प्राप्त कर चुके हैं, जबकि मॉनिटरिंग कमेटी सेल फैक्ट्री को निगम के अनुसार किसी भी सूरत में लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता है।

ऐसा बिल्कुल भी संभव नहीं है कि सील तोड़े जाने की भनक निगम अधिकारियों को ना हो, क्योंकि बिना निगम अधिकारियों के मिलीभगत से कार्य संभव नही है। हालाकि लाइसेंस इंस्पेक्टरों को सड़को पर अतिक्रमण की समस्याएं दिखाई नही देती है, क्योंकि इंस्पेक्टरों को अतिक्रमण की समस्याओं से कोई लाभ नहीं हो पाता है, इसलिए सड़को पर अतिक्रमण दिखाई नही दे रहा है, लेकिन लाभ करने के लिए फैक्ट्रियों के पीछे जरूर पड़े हुए हैं। नगर निगम विभाग को भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिए आयुक्त अश्विनी कुमार ने विभागों में बैठे अधिकारियों के इधर-उधर तबादले भी कर चुके हैं, लेकिन भ्रष्ट अधिकारी अपनी मनमानियो से बाज नहीं आ रहे हैं।

खबरें और भी हैं...

अपना शहर चुनें