NCERT को मिलेगा डीम्ड यूनिवर्सिटी का स्टेटस, जानें इससे क्या होगा बदलाव?

भारत की शिक्षा व्यवस्था एक नए दौर में कदम रखने जा रही है। जिस संस्था को अब तक केवल स्कूलों की किताबें बनाने वाली एजेंसी के रूप में जाना जाता था, वह जल्द ही पूरी यूनिवर्सिटी का रूप ले सकती है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है।

सीमित किताबों से शिक्षा और रिसर्च तक का विस्तार
अगर यह फैसला लागू होता है, तो NCERT सिर्फ कक्षा 1 से 12 तक की किताबें बनाने तक सीमित नहीं रहेगी। इसके दायरे में उच्च शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, रिसर्च और अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी शामिल होंगे। इससे भारतीय शिक्षा प्रणाली को नई दिशा और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

अंतिम फैसला कब तक आएगा
सूत्रों के मुताबिक, NCERT को डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने का प्रस्ताव अब यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के पास है। सभी आवश्यक डॉक्यूमेंट्स और औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। जनवरी के अंत तक UGC की अगली बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला आने की संभावना है। UGC की सिफारिश मिलने के बाद केंद्र सरकार की मंजूरी के साथ NCERT को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल जाएगा।

डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने के बाद बदलाव
डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने पर NCERT के काम करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। अब यह संस्था खुद ग्रेजुएशन (UG), पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) और पीएचडी (PhD) जैसी डिग्रियां प्रदान कर सकेगी। स्कूल शिक्षा के साथ-साथ एजुकेशनल रिसर्च में वृद्धि होगी, शिक्षा नीति पर गहन अध्ययन किया जाएगा, नए कोर्स और प्रोग्राम शुरू होंगे। शिक्षकों के लिए एडवांस ट्रेनिंग प्रोग्राम और आधुनिक शिक्षण तकनीक विकसित की जाएगी, जिससे स्कूल शिक्षा की क्वालिटी भी बेहतर होगी।

डीम्ड यूनिवर्सिटी क्या होती है?
भारत में सभी यूनिवर्सिटीज को मान्यता UGC देता है। डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी का दर्जा उन संस्थानों को दिया जाता है जो किसी विशेष क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। वर्तमान में देश में करीब 145 डीम्ड यूनिवर्सिटीज हैं। सबसे पहला दर्जा IISc बेंगलुरु को 1958 में मिला था। डीम्ड यूनिवर्सिटी को अपने कोर्स डिजाइन, सिलेबस निर्माण, एडमिशन नियम और फीस तय करने की पूरी स्वतंत्रता होती है।

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