
कानपुर। अभी तक प्राइवेट अस्पतालों वालों द्वारा फर्जी जांच रिपोर्ट बनाकर इलाज के नाम पर अवैध वसूली के कई किस्से सुने होंगे लेकिन साउथ सिटी के एक अस्पताल ने तो हद ही कर दी। प्रसूता की प्रसव से पूर्व जांच में उसे एचआईवी पॉजिटिव बता दिया। एड्स जैसी बीमारी का सुनकर जहां पूरा परिवार सदमे में आ गया, तो वहीं अस्पताल प्रशासन ने अस्सी हजार रुपये इलाज के नाम पर वसूले लिए।
अस्पताल संचालक समेत तीन एमबीबीएस डॉक्टरों व स्टाफ पर संगीन आरोप लगाया गया है। पैसा खत्म होने पर अस्पताल वालों ने मारपीट कर अभद्रता की, यह आरोप भी परिजनों ने लगाया। कई जगह भटकने के बाद आखिरकार दंपत्ति ने डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह के यहां गुहार लगाई तो मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
डीएम के यहां दिए शिकायती पत्र में सचेंडी के एक गांव में रहने वाले मुलायम यादव की पत्नी कोमल ने आरोप लगाते हुए बताया कि पिछले साल 24 दिसंबर को पत्नी को नौबस्ता के उत्कर्ष हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। प्रसव से पूर्व डॉक्टरों ने जांच कराई जिसमें पत्नी को एचआईवी पॉजिटिव की झूठी रिपोर्ट देकर प्रसव का ऑपरेशन कर दिया। पत्नी के एचआईवी होने से पति और परिजनों में कोहराम मच गया। इलाज के नाम पर अस्सी हजार रुपये भी वसूले और जब पैसा खत्म हो गया तो मरीज का इलाज रोक दिया। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने अभद्रता कर मारपीट भी की।
मानसिक रूप से टूटे दंपत्ति को एक परिचित ने फिर से जांच कराने को कहा तो कई प्राइवेट लैब व कांशीराम अस्पताल की लैब से एचआईवी की जांच कराई तो पता चला कि पति-पत्नी दोनों एचआईवी निगेटिव हैं। पति मुलायम ने कहा कि उत्कर्ष हॉस्पिटल वालों ने एचआईवी की फर्जी रिपोर्ट बनाकर वसूली की साथ ही मानसिक अत्याचार पहुंचाया है। तीन माह से न्याय के लिए परिजन दर-दर भटक रहे हैं। समाधान दिवस में डीएम के सामने पहुंचे तो उन्होंने सीएमओ हरिदत्त नेमी को तत्काल जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए।
खास बात यह है कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति का डाटा प्रशासन को भेजना होता है जो अस्पताल वालों ने नहीं भेजा। दंपत्ति द्वारा लगाए गए आरोपों की हमारा अखबार पुष्टि नहीं करता है। इस बाबत उत्कर्ष अस्पताल के संचालक से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन बात नहीं हो सकी।