
Moradabad : मुरादाबाद के अंबेडकर पार्क में उस वक्त सियासी बवाल खड़ा हो गया, जब बसपा और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के 70वें जन्मदिन का जश्न में तब्दील हो गया। पूरे मंडल से जोश और उम्मीदों के साथ पहुंचे पदाधिकारी और कार्यकर्ता उस समय हैरान रह गए, जब उन्हें न सम्मान मिला, न हाल-चाल पूछा गया, और न ही खाने की कोई व्यवस्था नजर आई।
सुबह-सुबह, दूर-दराज़ से खाली पेट अंबेडकर पार्क पहुंचे कार्यकर्ताओं ने ऑफ रिकॉर्ड अपनी नाराजगी जाहिर की। कार्यकर्ताओं का कहना था कि हमें बुलाया गया था, कहा गया था कि जन्मदिन का आयोजन भव्य होगा, लेकिन यहां पहुंचने पर जो देखा, उसने सारी उम्मीदें तोड़ दीं। न टेंट में इंतजाम था, न खाने का प्रबंध, और न ही किसी जिम्मेदार पदाधिकारी की सुध। पूरा आयोजन अव्यवस्था की भेंट चढ़ गया।
हालात तब और बिगड़ गए, जब मायावती के 70वें जन्मदिन पर बूंदी के लड्डू बांटे गए। लड्डू वितरण के दौरान ऐसा हाल देखने को मिला मानो व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई हो। कार्यकर्ताओं के बीच लड्डुओं को लेकर धक्का-मुक्की और छीना-झपटी शुरू हो गई। दृश्य इतने शर्मनाक थे कि पदाधिकारी मुंह देखते रह गए, और कुछ ही पलों में लड्डुओं के डिब्बे खाली हो गए।
कार्यकर्ताओं ने ऑफ रिकॉर्ड लगाए आरोप हैं कि उन्हें सिर्फ भीड़ बढ़ाने के लिए बुलाया गया, लेकिन जमीनी सच्चाई यह रही कि न सम्मान मिला, न ही मूलभूत सुविधाएं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस पार्टी में बहन जी के नाम पर कार्यकर्ता जान देने को तैयार रहते हैं, उसी पार्टी में आज वही कार्यकर्ता खुद को ठगा और अपमानित महसूस क्यों कर रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बसपा नेतृत्व को अपने ही कार्यकर्ताओं की नाराजगी का अंदाजा है, या फिर मायावती के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी होती रहेगी, और जमीनी कार्यकर्ता यूं ही उपेक्षा का शिकार होते रहेंगे? मुरादाबाद का यह जन्मदिन कार्यक्रम बसपा के अंदर पनप रही असंतोष की आग को साफ तौर पर उजागर करता नजर आया।
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